युवा होती पीढ़ी

लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़, (राजस्थान)।
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सोशल मीडिया के इस जमाने में स्क्रीन टाइम में समय व्यर्थ निकल जाता है। इसे रात को देर तक देखते रहना है और सुबह देर तक सोते रहना है। इस वजह से पूरी जीवन शैली में बिखराव हो गया है काफी अस्त व्यस्त हो गई है। जबकि किशोर और युवा पीढ़ी को अपना भविष्य बनाने और अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए लेकिन इसके लिए अपने जीवन शैली को बिल्कुल नियमित रूप से स्वस्थ रखें ऐसा प्रयास करें।
स्क्रीन टाइम कम रखें रात को समय पर समय सोए, सुबह जल्दी उठे। एक घंटा प्राणायाम करें उसके बाद एक गिलास दूध और साथ में घर का बना नाश्ता ले। बाजार का जंक फूड कतई न खाएं, समोसे कचोरी भी बहुत नुकसान करते हैं यह एक ही जले तेल में बार-बार निकाले जाते हैं तो यह अत्यधिक हानिकारक होते हैं।
तय समय पर विद्यालय, कॉलेज जाएं कोई भी क्लास ना छोड़े, हो सकता है जिस दिन जो अध्याय पढ़ाया गया हो वह आपके लिए समझना बहुत जरूरी हो अगर आप क्लास छोड़ेंगे तो आप उस अध्याय को समझने से वंचित रह जाएंगे। अपनी सोच को सकारात्मक रखें। अंग्रेजी में एक कहावत है’ a person is known by there’s company.’ अर्थात आपकी पहचान इससे होती है कि आपका संग साथ कैसा हैं और आप कैसे लोगों के साथ रहते हैं। अपने मित्र अच्छे बनाएं गलत संगत में ना पड़े।
अभिभावक भी अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न करें। दोस्तों के सामने उनको नीचा ना दिखाए। अगर बच्चों को कोई परेशानी है तो प्यार से पूछे और उसका समाधान निकाले। बच्चों का उत्साहवर्धन भी करते रहे इससे वह पढ़ाई के लिए प्रेरित होंगे। घर का वातावरण नकारात्मक ना हो पढ़ाई लिखाई के लिए अनावश्यक दबाव न डालें क्षमता के अनुसार पढ़ाई करने दे। अनावश्यक दबाव से मानसिक रूप से अवसाद ग्रस्त हो सकता है। इस उम्र के किशोर किशोरी बड़े भावुक होते है। हार्मोनल बदलाव के कारण उनकी सोच में फर्क आ जाता है। इसे अन्यथा ना ले। अपने से तुलना ना करें अपना समय अलग था उनका समय अलग है। अगर दिनचर्या नियमित बनाएंगे तो स्वस्थ और सुखी रहेंगे। समय की पाबंदी और अनुशासन जिंदगी में बहुत मायने रखते हैं। समय की पाबंदी न रहने से आप अपने साथ उन लोगों का भी नुकसान करते हो जिसको आपने समय दिया है और वह आपका इंतजार कर रहा है। उसका भी अमूल्य समय व्यर्थ हो रहा है। (लेखिका के अपने विचार हैं)

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