बेहद शर्मनाक

लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
www.daylifenews.in
चिकित्सा क्षेत्र ऐसा विभाग है जहां चिकित्सक मरीज की जान बचाने के लिए मरीज की अंतिम सांस तक अपनी पूरी कोशिश करते हैं। जो मरीज की हालत होती है उसी के अनुसार इलाज करने का फैसला लेना पड़ता है और ये एक पूरा टीम वर्क होता है। कोई भी चिकित्सक जानबूझकर लापरवाही नहीं करेगा। चिकित्सकों की मानसिकता को समझने का प्रयास करें। मरीज व परिवार वाले उनके साथ सहयोग करें ताकि वे मानसिक और शारीरिक रूप से अपने आपको सुरक्षित महसूस करे व आश्वस्त होकर मरीज का बेहतरीन इलाज कर सके। लेकिन हमारा दुर्भाग्य है कि हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां चिकित्सक पर लोग सवाल उठाते है। थोड़ा सा भी कुछ हो जाए तो चिकित्सक को दोषी ठहराया जाता है। हद तो तब हो जाती है जब मरीज मर जाता है तो चिकित्सक के साथ गाली देने और मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं। ये बेहद शर्मनाक और घटिया मानसिकता का परिचायक हैं। भारतीय संस्कृति में चिकित्सक को ईश्वर का दर्जा दिया गया है। उसके पेशे को शर्मसार न करे।अंगुली न उठाएं।
अभी 22 फरवरी को चित्तौड़गढ़ के सांवरिया जी सरकारी अस्पताल में एक ऐसा वाकया हुआ है जिसने इंसानियत को शर्मसार करके रख दिया है। चित्तौड़गढ़ निवासी एक बुजुर्ग को अस्थमा की बीमारी थी उसको अस्पताल में लाया गया तब उसका तेज सांस चल रहा था। हालत नाजुक थी। वहां पर डॉक्टर मनीष थंगराज जो तमिलनाडु के हैं और डॉक्टर तरूण कुमार जी ने तत्काल बीपी चेक किया, इसीजी करवाई, और नेबुलाईजेशन करवाया और वार्ड में भर्ती कर दिया गया। मात्र 20 मिनट बाद तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो तुरंत बिना देर किए आई सी यू में शिफ्ट किया गया, बीपी चेक किया गया, और सी.पी.आर. दिया लेकिन मरीज की मौत हो गई उसी वक्त उसके बेटे ने डाक्टर को थप्पड़ लगाना शुरू कर दिया और दूसरे परिवारजन के साथ मिल कर धक्का मुक्की शुरू कर दी। पुलिस बुलानी पड़ी। डॉक्टर मनीष थंगराज तुरंत ये कहते हुए निकल गए की ये नौकरी नही करनी और वे वापस नही आयेंगे। आप उसकी पीड़ा का अंदाजा लगा सकते है। घर जाकर अपने पिता को ये वाकया सुनाया। पिता ऐसी दर्दनाक घटना पर सहम गए और बोले – मैं अपने बेटे को मारने के लिए नहीं लाया हूं। तत्काल 25 लाख रुपए का चेक सरकार में जमा कर के अपने बेटे को लेकर हमेशा के लिए चित्तौड़ छोड़ कर चले गए। कितनी दुखद घटना है। सरकार किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करके डिग्री लेने के बाद सरकारी नौकरी देते वक्त एक नियम तय होता है जिसके अंतर्गत ये शर्त होती है कि स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने पर चिकित्सक को 25 लाख रुपए भरने होंगे।विचार करे कि 25 लाख की राशि क्या मायने रखती हैं। नौकरी छोड़ने पर विवश होना पड़ा। पूरा भविष्य सामने खड़ा था। अपमान और कैसी पीड़ा हुई होगी। वे भी तो एक इंसान ही है।हमारे, आप जैसे लोगो का इलाज करने के लिए हर वक्त तैयार रहते है। जो गरिमा पूर्ण पद पर आसीन है, कितनी मेहनत के बाद उसे ये डिग्री मिली होगी। इस प्रकार नौकरी छोड़ कर जाना पूरे समाज के लिए क्या शर्मनाक नहीं है? सोचिए अगर कभी आपातकालीन स्थिति में किसी चिकित्सक को दिखाने जाएंगे तो ऐसी मानसिकता रखने पर कोई चिकित्सक आपकी सेवा करेगा। कृपया अपनी मानसिकता बदलिए और चिकित्सक का सम्मान करना सीखिए इससे एक स्वस्थ सामाजिक माहौल बनेगा। तभी स्वास्थ्य सेवा का पूरा लाभ मिलेगा। (लेखिका के अपने विचार हैं)

One thought on “बेहद शर्मनाक

  1. यह लेख समाज के लिए एक आईना है । कोविड महामारी में यही समाज चिकित्सक को भगवान का दर्जा दे रहा था आज वही समाज के कुछ लोग अमानवीय कृत करने से नहीं झुकते जीवन लेना और देना दोनों ही प्रभु के हाथ में हैं चिकित्शक भरसक प्रयास करके किसी भी मरीज के लिए हरसंभव प्रयास करता है ज्यादातर बार सफल भी हो जाता है लेकिन कभी-कभी मरीज की मृत्यु भी हो जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि उसे मृत्यु के लिए चिकित्सक जिम्मेदार है।
    कानून बनाने से कुछ नहीं होगा समाज को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *