फीकी चाय : मीठी चाय

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लेखक : रमेश जोशी
प्रधान सम्पादक, ‘विश्वा’, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, यू.एस.ए.
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आज तोताराम को आये और बैठे कई देर हो गई । बैठने की मुद्रा कई बार बदलने के बाद बोला- तो क्या आज बिना किसी कार्यवाही के ही बरामदा संसद का सत्रावसान हो जाएगा ?
हमने कहा- आज तुम्हारी उसी तरह से कोई आवश्यकता नहीं है जिस प्रकार भारत की संसद में विपक्ष की । जब तू बोलने का अवसर न दिए जाने के कारण हल्ला मचा कर बहिर्गमन कर जाएगा तब हम सर्वसम्मति से बिल पास करवा लेंगे ।
बोला- मतलब ?
हमने कहा- मतलब यह कि आज चीनी नहीं है । थोड़ी देर में कोने वाले चौधरी की दुकान खुल जाएगी तब चीनी ले आएंगे । दुकान आठ बजे खुलती है और तब तक तुझे रुकना नहीं है । वैसे तू चाय पीता ही चीनी के चक्कर में है , फीकी चाय या ब्लेक कॉफी तो बुद्धिजीवी पीते हैं और तुम भक्त लोगों का बुद्धि के क्या लेना देना ।
बोला- फीकी या मीठी, चाय या कॉफी पिला या नहीं लेकिन हमारी बुद्धि पर शक ठीक नहीं है । वैसे तूने कोने वाले चौधरी की दुकान से चीनी लाने के लिए परमीशन ले ली है या नहीं ?
हमने कहा- चीनी खरीदें या नमक । इससे खरीदें या उससे, किसी से परमीशन लेने की क्या जरूरत । यह हमारे और दुकानदार के बीच का मामला है ।
बोला- नहीं मास्टर, अब वह बात नहीं रही । अब ज़माना बदल गया है । अब दुनिया बहुत छोटी, एक दूसरे पर निर्भर और कूटनीति से भरपूर हो गई है । अब नेहरू वाला ज़माना नहीं रहा जब हम स्टील के कारखाने, आई आई टी आदि अलग-अलग देशों के सहयोग से बना रहे थे ।यहाँ तक कि उस जमाने में अमेरिका ने बोकारो का स्टील प्लांट लगाने का वादा किया था लेकिन लटकाता रहा तो हमने रूस के सहयोग से लगा लिया ।
बोला- उस समय की बात और थी ।
हमने कहा- और बात क्या ? उस समय तो हम कोई विकसित देश क्या ढंगे से विकासशील भी नहीं थे ।देश का ढांचा खड़ा करने के लिए जाने किस किस काम के लिए दुनिया में भाग-दौड़ रहे थे । हाँ, लेकिन तब हम मानसिक और नैतिक रूप से कमजोर नहीं थे ।
बोला- तुझे क्या पता ? आज कल दुनिया वैसी नहीं रही । बहुत कुछ सोचना पड़ता है ।क्या पता किसी ऐसे वैसे से कोई सामान खरीद लें तो अमेरिका कहीं सौ दो सौ प्रतिशत टेरिफ़ न लगा दे । तुझे पता होना चाहिए कि यह दुकानदार कम्युनिस्ट अमराराम की पार्टी का है ।और अमेरिका कम्युनिस्टों से बहुत खार खाता है ।
हमने कहा- अमेरिका से डरें वे लोग जिनका एपस्टीन फाइल में नाम है । अपना रिकार्ड एकदम साफ है । इसलिए हम न किसी के सामने सरेंडर करेंगे और न ही कंप्रोमाइज्ड होंगे ।
बोला- लेकिन तू भी तो कई बार बच्चों के पास अमेरिका आता-जाता रहा है कि नहीं । बस, इतने पर ही राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जेल में डाला जा सकता है । फिर सिद्ध होते रहना निर्दोष केजरीवाल, सिसोदिया, स्टेंस स्वामी की तरह । तुझे कोई राम रहीम की तरह क्लीन चिट या पेरॉल नहीं देने वाला । हाँ, अगर तेरे पास भारत के रूस से तेल खरीदने के लिए एक महिने की परमीशन की तरह कोई छूट हो तो बात और है ।
हमने कहा- हम इस प्रकार की कोई बंदिश मानने वाले नहीं है ।साँच को आँच नहीं ।
बोला- गाँधी का आज भी सारी दुनिया सम्मान करती है । लेकिन मारने वाले ने तो उनको निबटा दिया कि नहीं । मैं इस चक्कर में पड़ने वाला नहीं हूँ । इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से मैं चौधरी की दुकान से चीनी खरीदने के मामले से अपने आप को उसी तरह से अलग करता हूँ जिस प्रकार मोदी जी ने खामेनई की हत्या के मामले में श्रद्धांजलि देने या शोक प्रकट करने से अपने आप को अलग कर लिया ।
और तोताराम उठकर चल गया है ।
(लेखक के अपने विचार हैं)

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