ईद

लेखक : शकील जयपुरी
(मशहूर शायर), जयपुर (राजस्थान)
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देखते देखते ईद आ गई
कहीं बच्चे खुशियों में महक रहे हैं
यह दिल की मुहब्बत है कि चमक आ गई
नज़र से जो भी देखते मुस्कुराहट है
चेहरों पे सभी को खुश कर रहे हैं
कोई बुजुर्ग है तो वह भी मुस्कुरा रहे हैं
कोई जवान है लोगों के देखते
फूलों की महक रही है
हवाएं और प्यार मुहब्बत सरसराती है
महकती मुस्कुराती, प्यार मोसम में
मौसम की तरह है
इनायत ईद भी वफाओं को सर पर रखा-
बहुत मुहब्बत खूब हुई…