
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
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पहले विद्यालयों में बच्चों को नियमित रूप से एक पेज श्रुति लेख लिखने का अभ्यास करवाया जाता था। लेकिन अब नहीं करवाया जाता है। लेकिन अभिभावक नियमित रूप से घर पर बच्चों को एक पन्ने पर श्रुति लेख लिखने की आदत डालें इससे बच्चों की लिखावट में सुधार होने के साथ-साथ व्याकरण संबंधी गलतियों में भी सुधार हो जाता है। लिखने के लगातार अभ्यास से लिखने की गति बढ़ती है इससे परीक्षाओं में बहुत फायदा होता है। अगर किसी सवाल का जवाब पूरा आता है लेकिन तेज गति से लिखने का अभ्यास नहीं है तो तय समय में उस सवाल का पूरा उत्तर नहीं लिख सकते हैं और प्रश्न पत्र निर्धारित समय में हल नहीं कर सकते हैं। तकलीफ इस बात की होती है कि उत्तर आने के बावजूद उसको लिख नहीं सके। अत: विद्यालय में पुराने समयनुसार नियमित रूप से श्रुति लेख के अभ्यास के लिए एक कालांश अवश्य रखा जाए या फिर बच्चों को गृह कार्य में एक पेज श्रुति लेख लिखने का अभ्यास अनिवार्य कर दिया जाए। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगर लिखने का अभ्यास अच्छा है तो रटने की बजाय अगर लिख कर याद करेंगे तो एक बार में याद हो जाएगा और दिमाग में हमेशा के लिए फीड हो जाएगा। (लेखिका के अपने विचार है)