
पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के स्पष्टीकरण देने और उनको लेकर मदन राठौड़ द्वारा की गई बयानबाजी पर
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जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने x हैंडल पर लिखा : देखिए, मेरी दृष्टि में वसुंधरा जी को सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी। पहली बात तो यह है कि मैं उनकी पार्टी के मामलों में कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता। लेकिन जो हालात हैं, जिस प्रकार से बीजेपी के अध्यक्ष बोलते हैं, उनकी एक अलग ही एप्रोच है ,बोलने में भी और व्यवहार में भी। व्यक्तिगत रूप से वे अच्छे और व्यवहारिक व्यक्ति हैं, हमारे उनसे अच्छे संबंध हैं। लेकिन जब पार्टी का दबाव होता है तो पता नहीं वे क्या बोल जाएं,ऐसी स्थिति बन जाती है।
चाहे टिप्पणी हमारे बारे में हो या वसुंधरा जी के बारे में ,क्या कोई पीसीसी अध्यक्ष या बीजेपी अध्यक्ष इस तरह बार-बार कहता है कि वसुंधरा जी मुख्यमंत्री बनेंगी या नहीं? ऐसी टिप्पणी कम से कम मोदी जी के लिए छोड़नी चाहिए थी, या फिर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को करनी चाहिए थी। खैर, यह उनकी पार्टी का मामला है, हम क्या कर सकते हैं।
वसुंधरा जी को जवाब देने या सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि लोग समझते हैं कि उनकी भावना क्या थी और उन्होंने किस संदर्भ में बात कही थी। अनावश्यक टिप्पणियां की गईं। हालांकि, यह उनकी अपनी मर्जी है।
वसुंधरा जी कुछ कह रही हैं, मदन राठौड़ कुछ और कह रहे हैं यह उनकी पार्टी की स्थिति है। ये लोग हम पर आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस में झगड़े हैं, लेकिन वास्तविक दुर्गति तो इनकी हो रही है। आप खुद देख रहे हैं कि कौन क्या बोल रहा है। इनकी स्थिति सड़कों पर आ गई है।
हम सब एक हैं। राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और उसी तरह आगे बढ़ रही है। यहां पर परंपरा रही है कि सरकारें वन बाय वन बदलती हैं। जूली साहब यहां खड़े हैं, हमारे नेता प्रतिपक्ष हैं। वे भी मेरी बात का समर्थन करेंगे कि अगली बार कांग्रेस ही आएगी।
मीडिया द्वारा मदन राठौड़ की उस बयानबाजी पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर, जिसमें मेरे द्वारा पाकिस्तान की ओर से की गई मध्यस्थता संबंधी प्रतिक्रिया का जिक्र किया गया:
देखिए, लोग संदर्भ को पढ़ते नहीं हैं। मैंने कहा था कि हमने दुनिया के सामने एक अवसर गंवा दिया। मध्यस्थता करने का काम हिंदुस्तान को करना चाहिए था। दुनिया में भारत का एक अलग ही आभामंडल (औरा) है। हमारा देश शांति, भाईचारे और अहिंसा की बात करने वाला देश है।
दुनिया के कई देश उम्मीद कर रहे थे कि भारत आगे आकर अपील करेगा और मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कराने का प्रयास करेगा। लेकिन उसके बजाय पाकिस्तान जैसे देश की चर्चा होने लगी, जिसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला माना जाता है और जिस पर वर्षों से ऐसी छवि बनी हुई है।
जब वही देश शांति स्थापित करने की बात करता है, तो स्वाभाविक रूप से भारतीयों को दुख होता है। मैंने वही दुख प्रकट किया था। यदि मदन राठौड़ मेरे इस भाव को नहीं समझ पा रहे हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
आप बताइए, पाकिस्तान की क्या स्थिति है? इंदिरा गांधी जी के समय उसके दो टुकड़े हो गए थे। क्या वह कुछ कर पाया? फिर भी आज दुनिया में चर्चा हो रही है कि पाकिस्तान शांति की बात कर रहा है।
आज जब इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति से पूरी दुनिया प्रभावित और चिंतित है, तो जो भी देश शांति की बात करेगा, लोग उसकी ओर देखेंगे। इस समय दुनिया के कई देश इस्लामाबाद की ओर देख रहे हैं कि वहां क्या निर्णय होगा।
मेरी बात केवल इतनी थी कि वह स्थिति भारत की होनी चाहिए थी। मेरा मतलब ये था। https://x.com/i/status/2043620639215599736