50 वर्ष की उम्र में 97% अंक हासिल कर शाइस्ता सिद्दीकी बनीं मिसाल

मदीना ग्रुप ऑफ क्लासेज की तलबा ने साबित किया-इल्म सीखने की कोई उम्र नहीं होती
जाफर लोहानी
www.daylifenews.in
जयपुर/बीकानेर/नोएडा। जहां अक्सर उम्र को सीखने की राह में बाधा माना जाता है, वहीं ऑनलाइन दीनी इदारा मदीना ग्रुप ऑफ क्लासेज की छात्रा शाइस्ता सिद्दीकी ने 50 वर्ष की उम्र में नाजरा के इम्तहान में शानदार 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि अगर जज्बा, मेहनत और लगन हो तो तालीम हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती।
नोएडा की शाइस्ता सिद्दीकी की यह कामयाबी उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो शिक्षा प्राप्त करना तो चाहती हैं लेकिन उम्र या सामाजिक झिझक के कारण पीछे रह जाती हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि चाहे दीनी तालीम हो या दुनियावी, सीखने की चाह और हौसला इंसान को हर मंजिल तक पहुंचा सकता है।
बताया गया कि शाइस्ता सिद्दीकी ने पहले नाजरा में 97प्रतिशत अंक प्राप्त किए ओर अब अपनी मेहनत को जारी रखते हुए वह आगे क़ारिया बनने की तैयारी में जुटी हुई हैं।
उन्होंने यह सफलता दारुल उलूम मदरसा सुलेमानिया रहमानिया, बीकानेर से आयोजित इम्तेहान में हासिल की, जो मदरसा निजामिया के हाफिज मुनीर अहमद साहब की निगरानी में संपन्न हुआ। उनकी पढ़ाई ऑनलाइन इदारा मदीना ग्रुप ऑफ क्लासेज के माध्यम से हुई, जिसे रुबीना भाटी द्वारा वर्ष 2021 से संचालित किया जा रहा है।
आज यह ऑनलाइन इदारा देशभर की बच्चियों और महिलाओं के लिए दीनी तालीम का मजबूत माध्यम बन चुका है, जहां घर बैठे भारत के विभिन्न राज्यों से छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। शाइस्ता सिद्दीकी की सफलता ने न सिर्फ मदीना ग्रुप ऑफ क्लासेज का मान बढ़ाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सही मार्ग दर्शन और दृढ़ निश्चय से हर उम्र में सफलता हासिल की जा सकती है। शाइस्ता सिद्दीकी की यह उपलब्धि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है। इस दौरान रुबीना भाटी ने कहा इल्म हासिल करने के लिए उम्र नहीं, हौसला मायने रखता है।

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