तिरुवनंतपुरम से प्रारंभ हुआ प्रवासी भारतीयों के हितों का एक नया राष्ट्रीय अभियान

लेखक : श्रीप्रकाश सिंह निमराजे
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भारत केवल अपनी भौगोलिक सीमाओं तक सीमित राष्ट्र नहीं है, बल्कि विश्व के लगभग प्रत्येक महाद्वीप में बसे करोड़ों प्रवासी भारतीय उसकी संस्कृति, सभ्यता और लोकतांत्रिक मूल्यों के जीवंत प्रतिनिधि हैं। आज प्रवासी भारतीय विश्व अर्थव्यवस्था, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, व्यापार और प्रशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके समक्ष पारिवारिक विवाद, वैवाहिक समस्याएँ, उत्तराधिकार, नागरिकता, बच्चों की अभिरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और कानूनी जटिलताओं जैसी अनेक चुनौतियाँ मौजूद हैं।
इन विषयों पर लंबे समय तक अपेक्षित सामाजिक और अकादमिक विमर्श का अभाव रहा। इसी आवश्यकता को अनुभव करते हुए लगभग चार दशकों से शिक्षा, समाजसेवा, साहित्य, बाल अधिकार, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक विकास के क्षेत्र में सक्रिय श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने एक नई दिशा में पहल करने का निर्णय लिया।
गोपाल किरण समाजसेवी संस्था (GKSSS) के माध्यम से वर्ष 2026 में केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से “प्रवासी भारतीयों के पारिवारिक विवाद : चुनौतियाँ एवं सुधार की संभावनाएँ” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला, राष्ट्रीय सम्मान समारोह तथा अकादमिक संवाद का आयोजन किया गया। यह केवल एक सम्मेलन नहीं था, बल्कि भारत में प्रवासी भारतीयों से जुड़े सामाजिक एवं पारिवारिक प्रश्नों पर एक संगठित राष्ट्रीय विमर्श की शुरुआत थी।
इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, साहित्यकारों, समाजसेवियों तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर प्रवासी भारतीयों की समस्याओं के विविध आयामों पर गंभीर चर्चा की। कार्यशाला में यह विचार सामने आया कि प्रवासी भारतीयों की समस्याओं का समाधान केवल न्यायालयों या सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि समाज, शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं और नागरिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
श्रीप्रकाश सिंह निमराजे का मानना है कि प्रवासी भारतीय भारत के “सांस्कृतिक राजदूत” हैं। वे जहाँ भी रहते हैं, भारतीय भाषा, संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा, पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ बनाने, कानूनी जागरूकता बढ़ाने और भारत से उनके भावनात्मक संबंधों को मजबूत करना राष्ट्रीय दायित्व है।
इसी सोच के साथ GKSSS ने इस विषय को एक राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप देने का संकल्प लिया है। केरल से प्रारंभ हुई यह यात्रा अब देश के अन्य राज्यों तक पहुँच रही है। हैदराबाद, शिलांग तथा भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इसी विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और सम्मान समारोहों के आयोजन की योजना इस बात का प्रमाण है कि यह पहल एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले रही है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल समस्याओं की पहचान करना नहीं, बल्कि शोध, नीति-निर्माण, सामाजिक सहयोग और जन-जागरूकता के माध्यम से व्यावहारिक समाधान विकसित करना है। विश्वविद्यालयों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक संस्थाओं, प्रवासी भारतीय संगठनों तथा नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच पर लाकर संवाद की संस्कृति विकसित करना इस अभियान की प्रमुख विशेषता है।
आज जब भारत विश्व मंच पर अपनी भूमिका को निरंतर सशक्त बना रहा है, तब प्रवासी भारतीयों के हितों की रक्षा और उनके साथ निरंतर संवाद स्थापित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। तिरुवनंतपुरम से आरंभ हुई यह पहल इसी दिशा में एक सार्थक कदम है, जो भविष्य में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।
श्रीप्रकाश सिंह निमराजे की यह पहल उनके चार दशकों के सामाजिक अनुभव का स्वाभाविक विस्तार है। समाज के कमजोर वर्गों, बच्चों, महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने के बाद अब उन्होंने वैश्विक भारतीय समुदाय की चुनौतियों को भी अपने सामाजिक सरोकारों का हिस्सा बनाया है।
यह कहा जा सकता है कि तिरुवनंतपुरम से प्रारंभ हुआ यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रवासी भारतीयों के सम्मान, अधिकार, पारिवारिक सुरक्षा और भारत से उनके स्थायी संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक नए राष्ट्रीय अध्याय का शुभारंभ है।
“प्रवासी भारतीय केवल भारत की आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना, पारिवारिक मूल्यों और वैश्विक प्रतिष्ठा के सशक्त प्रतिनिधि हैं। उनके सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए संवाद, शोध और सहयोग ही भविष्य का मार्ग है।” – श्रीप्रकाश सिंह निमराजे
(लेखक के अपने विचार हैं)

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