पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मीडिया से बातचीत

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प्रदेश के विद्यालयों में बिना अनुमति फोटो , वीडियो इत्यादि न बनाए जाने संबंधी आदेश पर प्रतिक्रिया:
अभी तो ऐसी स्थिति बनी है प्राइमरी स्कूल में क्या हो रहा है? एक तरफ तो जेन – ज़ी जंतर मंतर बैठे और राहुल गांधी जी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे दिया। इशू बनाया, पूरे देश में कांग्रेस कमेटियों ने धरने दिए थे। शिक्षा का जो सेक्टर है, इसमें आमूलचूल परिवर्तन हो, जिससे पेपर लीक भी नहीं हो, शिक्षा का जो अप्रोच है वो बिल्कुल नई आए जिससे कि देश दुनिया के अंदर मैसेज जाए कि हिंदुस्तान के अंदर शिक्षा के क्षेत्र को तवज्जो दी जा रही है।
शिक्षा, स्वास्थ्य दो ही बातें होती हैं।आम आदमी चाहता है कि स्वास्थ्य अच्छा बना रहे, उसके लिए सुविधा मिले और बच्चों की पढ़ाई अच्छी हो। राजीव गांधी जी के वक्त में मानव संसाधन मंत्रालय बनाया गया था और मिस्टर पी वी नरसिम्हा राव जी जो बाद में प्रधानमंत्री बने, उनको बनाया गया इस मंत्रालय का मंत्री। आप कल्पना कर सकते हो कि कहाँ तो नरसिम्हा राव जी मंत्री बने और कहाँ यह धर्मेंद्र प्रधान जी मंत्री बने शिक्षा मंत्रालय के जिसका नाम बदल दिया।
पूरे देश में अभी यही बहस चल रही है। उस बहस के चलते -चलते स्टेट गवर्नमेंट ने बीच में यह आदेश जारी कर दिया। तो क्या मुख्यमंत्री जी से डिस्कस करते हैं कि नहीं करते मंत्री लोग? क्या मंत्रिमंडल की पूरी सलाह थी इस आदेश के अंदर? क्या मंत्रिमंडल ने मिलकर यह फैसला किया क्या? यह हम जानना चाहते हैं। इतना बड़ा फैसला ? आपने मीडिया को रोक दिया अंदर जाने से। दूसरा कोई अंदर जा नहीं सकता। अरे पचास काम पड़ते हैं स्कूल के अंदर। आपने कह दिया कि अंदर एंटर नहीं कर सकते, परमिशन लो उसके लिए। मजाक बना रखी है इन्होंने, सरकार की मजाक बना रखी है, डिपार्टमेंट की तो मजाक बनी हुई है पहले से ही। इसलिए यह आदेश वापस लेना चाहिए ये मेरा मानना है।
https://x.com/ashokgehlot51/status/2089654748236644799?s=20

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