
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। 11वीं शरीफ के मौके पर बड़े पीर साहब हज़रत शैख सय्यद अब्दुल कादिर जिलानी (रहमतुल्लाह अलैह) की याद में हजरत सैय्यद लाल खां बाबा की दरगाह में फातिहा और दुआ का एहतमाम किया गया।
सूफ़ी अब्दुल रज्जाक शैख ने बताया कि हज़रत अब्दुल कादिर जिलानी को गौस-ए-आज़म और बड़े पीर के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। आपका जन्म 1 रमज़ान 470 हिजरी को जिलान (ईरान) में हुआ था। आप कादरिया सिलसिले से हैं।
आपकी तालीम यही थी कि अल्लाह से डरो, उसके सिवा किसी से मत डरो, गरीबों, यतीमों और भूखों को खाना खिलाओ, रोते हुए के आँसू पोंछो और मजलूम की मदद करो।
गद्दी नशीन मोईन खान ने कहा कि
हज़रत गौस-ए-आज़म की तालीम – इंसानियत की खिदमत पर ही चलता है। मोईन खान ने कहा कि बड़े पीर साहब ने कभी हिंदू-मुसलमान में फर्क नहीं किया, उन्होंने सबको एक अल्लाह की तरफ बुलाया और मोहब्बत का पैगाम दिया।
दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ जिसमें क्षेत्र के अमन और भाईचारे के लिए दुआ की गई। जायरीनो ने एक स्वर में कहा कि या गौस-ए-आज़म, हम सब पर अपना करम बनाए रखना। इस अवसर पर बाबू खान ताला सहित कई जायरीन उपस्तिथ थे।