आत्मनिर्भर के बजाय सांभर जलदाय विभाग बीसलपुर पर ही निर्भर

बारिश से कुओं का भारी जल स्तर बढ़ा, फिर भी पेयजल सप्लाई का टोटा
शैलेश माथुर की रिपोर्ट
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सांभरझील। इस बार मानसून ने खुलकर मेहरबानी दिखाई है। जिन कुओं का जलस्तर पूरी तरह से घट गया था उनका लेवल 40 से 50 फीट ऊपर आ गया है। बारिश से भारी पानी की आवक होने के कारण आसपास के क्षेत्र के कुओं का जिस प्रकार जल स्तर बढ़ा है उसकी वजह से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। ग्राम सिवानिया में विभाग के करीब 20 और सांभर क्षेत्र में स्थित करीब 8 सरकारी कुओं में जिस हिसाब से जबरदस्त पानी की मात्रा बढी है वह क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने के लिए 2 साल से भी अधिक समय तक पर्याप्त है। सूत्र बताते हैं कि यदि 24 घंटे भी पेयजल सप्लाई की जाए तो भी कुओं का जलस्तर अच्छी स्थिति में बना रहेगा। सूत्र बताते हैं कि निवर्तमान अशोक गहलोत की सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 4 साल पहले इन कुओं की स्थिति को बेहतर बनाने व पानी के लिए बल्लियां व अन्य कार्य के लिए करीब 50 लाख रुपए मंजूर किए गए थे, उस दौरान कितना काम हुआ यह तो विभाग ही जाने लेकिन इतना जरूर है कि जिस काम के लिए सरकारी धनराशि मंजूर की थी उसका उपयोग होने से पहले ही बारिश के दौरान बीसलपुर बांध छलक उठा था, इस कारण कुओं का मेंटेनेंस नहीं किया गया तो आखिर वह धनराशि खर्च कहां पर हुई या फिर वह लेप्स हो गई या केवल कागजों में ही कुओं को ठीक करना बता दिया गया, यदि ऐसा नहीं होता तो फिर सरकारी कुओं को अभी तक नाकारा क्यों बना रखा हैं। सूत्रों ने यह भी बताया गया कि दो-तीन को छोड़कर बाकी का उपयोग क्यों नहीं हो रहा है यह एक गंभीर प्रश्न है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग यदि सांभर में इन सरकारी कुओं से पेयजल सप्लाई का काम ईमानदारी से कर दे तो फिर बीसलपुर पर पानी की डिमांड की आवश्यकता कम रह जाएगी अथवा नहीं रहेगी। बताया गया कि जब किसानों के कुएं में पानी इतना है कि वह 24 घंटे काम ले रहे हैं तो फिर सरकारी सिस्टम में ऐसा लफड़ा क्यों हो रहा है जलदाय विभाग के ऑफिस के आसपास ही पांच कुएं बताए गए हैं। बताया गया कि वर्ष 1964 में सिवानिया से ही पानी की सप्लाई सांभर होती थी। वर्ष 1984 के आसपास बाद में सांभर में कुए बनाए गए थे जहां से पानी की सप्लाई के काम में लिया जाता था। इस प्रकार विभाग के खुद के खाते में पर्याप्त पानी है लेकिन वह आत्मनिर्भर होने के बजाय केवल काम चोरी और टालमटोल की नियत के चलते बीसलपुर पर निर्भर बना हुआ है। विभाग ने लोगों व राजनीतिक दल के पदाधिकारियों के दिमाग में यह बात घुसा रखी है कि बीसलपुर से पानी कम मिलता है।

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