
जाफर लोहानी
शाहपुरा, मनोहरपुर (जयपुर)। दीपावली के पावन अवसर पर शाहपुरा की ऐतिहासिक धरोहर मोती महल एवं कल्याण जी मंदिर एक बार फिर अपनी पारंपरिक भव्यता में दमक उठे। युवराज दिगराज सिंह शाहपुरा द्वारा अपने व्यक्तिगत प्रयासों एवं मार्गदर्शन में दोनों स्थलों को उनके मूल राजसी स्वरूप में सजाया गया, ताकि शाहपुरा के आमजन और युवा पीढ़ी उस गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर को नज़दीक से महसूस कर सकें।
शहरवासियों ने जब दीपों की रोशनी में सजे मोती महल और कल्याण जी मंदिर के दर्शन किए, तो मानो इतिहास पुनः जीवित हो उठा। पूरी रात मंदिर परिसर में भक्ति और उल्लास का वातावरण छाया रहा। स्थानीय नागरिकों ने इस पहल को “संस्कृति का पुनर्जागरण” बताते हुए दिगराज सिंह शाहपुरा जी के प्रयासों की सराहना की।
दिगराज सिंह शाहपुरा ने कहा कि —
“हमारी संस्कृति, हमारी सबसे बड़ी पहचान है। दीपावली सिर्फ उत्सव नहीं, यह अपने अतीत को सम्मान देने और नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का अवसर है। मोती महल और कल्याण जी मंदिर सिर्फ इमारतें नहीं, यह हमारी आत्मा का हिस्सा हैं। मेरा उद्देश्य है कि शाहपुरा की हर धरोहर फिर उसी गरिमा के साथ चमके, जैसी हमारे पूर्वजों ने इसे छोड़ा था।”
स्थानीय निवासियों ने कहा कि इतने वर्षों बाद मोती महल और कल्याण जी मंदिर ने जिस रूप में अपनी ऐतिहासिक छवि प्राप्त की है, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। इससे आने वाली पीढ़ियों में अपनी परंपरा और संस्कृति के प्रति गर्व की भावना अवश्य जागृत होगी।
दिगराज सिंह शाहपुरा जी ने यह भी बताया कि आने वाले समय में शाहपुरा की अन्य धरोहरों और मंदिरों को भी इसी तरह संरक्षित व पुनर्सज्जित किया जाएगा, ताकि “संस्कृति के साथ विकास का संगम” का संदेश समाज तक पहुँचे।