कर्नाटक कांग्रेस में फिर बवाल

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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इस साल के अंत में कर्नाटक में सिद्धारामिया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे हो रहे है.इसके साथ ही सरकार के नेतृत्व में बदलाव की सुगबुगाहट फिर तेज हो गई है . इसी बीच सिद्धारामिया के छोटे बेटे यतीन्द्र सिद्धारामिया के एक बयान ने आग में घी का काम किया है . इससे में पार्टी नेतृत्व को लेकर एक नया बवाल शुरू हो गया है।
पिछले दिनों बेलगवी में एक समारोह में बोलते हुए यतीन्द्र सिद्द्धारामिया , जो इस समय राज्य विधान परिषद के सदस्य है , ने यह कहा कि अगर राज्य में कभी मुख्यमंत्री बदला गया तो उनके स्थान पर मुख्यमंत्री बनने के लिए राज्य के सार्वजानिक निर्माण मंत्री सतीश जारकिहोली सबसे योग्य नेता है . इस बयान से पिछले कुछ महीनों से शांत सत्तारूढ़ कांग्रेस के हलकों में भूचाल सा पैदा हो गया . इससे एक मतलब तो यह निकला गया कि अगले कुछ महीनों में राज्य में मुख्यमंत्री बदला जायेगा . दूसरा यह संकेत भी मिला , इस पद के सबसे बड़े दावेदार और राज्य के उप मुख्यमंत्री डी. के . शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने कोई संभावना नहीं है।
सिद्धारामिया की तरह जारकिहोली पिछड़ा वर्ग से आते है. उनका सारा परिवार , जिसमें पांच भाई भी शामिल है , का राज्य के मराठी भाषी इलाके बेलगवी में एक छत्र राज है.ये भाई समय के अनुसार दल बदलते रहते है तथा इनमें से कोई ने कोई सरकार में मंत्री रहता रहा है . इस इलाके की सहकारी चीनी मिलों में भी इस परिवार का दबदबा है यतीन्द्र के बयान में सबसे अधिक खलबली शिवकुमार के समर्थकों पैदा हुई. उन्हें लगा के कि उनके नेता को मुख्यमंत्री के दौड़ से अलग किया जा रहा है। बात पार्टी आला कमान तक पहुंची तथा वहाँ से आदेश आया जिसमें यतीन्द्र को कहा गया कि वे अपना बयान वापिस लें . यतीन्द्र ने गोलमोल शब्दों में यह कहा कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया है। उनका आशय कभी यह नहीं था कि नेतृत्व में में बदलाव के बाद जारकिहोली ही इस पद के सलिए सबसे योग्य उम्मीदवार है। लेकिन इसके बाद भी यह राजनीतिक बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा। यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने यह बयान अपने पिता के इशारे पर दिया था ताकि शिवकुमार के समर्थकों में कुछ दरार पैदा हो जाये तथा उनके कुछ समर्थक इस मुद्दे पर उनका साथ छोड़ दें।
यतीन्द्र सिद्धारामिया पेशे से डॉक्टर है। उन्होंने 2018 में राजनीति में प्रवेश किया था तथा अपना पहला विधानसभा चुनाव वरुणा से लड़ा था। वे अच्छे खासे वोटों से जीते। लेकिन उस चुनाव में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला तथा बीजेपी सत्ता में आई। 2023 के विधानसभा चुनावों में उनको उम्मीदवार नहीं बनाया गया . लेकिन 2024 में उनको विधान परिषद् का सदस्य बना दिया गया। उनको अपने पिता का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है क्योंकि सिद्धारामिया के बड़े बेटे राकेश की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है।
शिवकुमार उप मुख्यमंत्री के साथ साथ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी है . वे एक कुशल संगठक और लोकप्रिय नेता है . 2023 के विधानसभा चुनावों में जब कांग्रेस को भारी बहुमत मिला तो वे मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे . वे गाँधी परिवार के नज़दीक माने जाते है तथा वोक्कालिंगा समुदाय के बड़े नेता है . लेकिन चुनावों के बाद लम्बे समय तक नए मुख्यमंत्री के पद के बारे में निर्णय नहीं हो सका क्योंकि शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के लिए अड़े हुए थे . लेकिन पार्टी ने आखिर में सिद्धारामिया के पक्ष में निर्णय किया . कारण यह था कि वे पिछड़ा वर्ग के बड़े नेता है . वे पहले भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं तथा उनकी छवि एक कुशल प्रशासक की है .शिवकुमार को उप मुख्यमंत्री बनाया जाना तय हुआ .इसके साथ यह भी तय हुआ की वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने रहेंगे।
शिवकुमार के समर्थकों को दावा है कि उस समय यह भी तय हुआ था कि सिद्धारामिया अपना आधा कार्यकाल पूरा कर मुख्यमंत्री की कुर्सी शिवकुमार को दे देंगे . लेकिन सिद्धारामिया का कहना है कि ऐसी कोई सहमति नहीं बनी थी। सिद्धारामिया का आधा कार्यकाल इस साल के अंत में पूरा हो रहा है इसलिए नेतृत्व में परिवर्तन की पार्टी में जोरों से चर्चा हो रही है .यतीन्द्र के बयान ने इस चर्चा को नया मोड दे दिया है। हालाँकि अपनी ओर से सिद्धारामिया यह बात कई दोहरा चुके है कि वे अपना पांच साल कार्यकाल पूरा करेंगे। (लेखक का अपना अध्ययन एवंअपने विचार है)

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