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शाहपुरा (जयपुर)। शाहपुरा की पावन भूमि सदा से ही समरसता, संस्कृति और सेवा की परंपरा की जीवित प्रतीक रही है। यहाँ की मिट्टी ने अनेक ऐसे युगपुरुष देखे हैं जिन्होंने समाज को एकता, समानता और मानवता का संदेश दिया। इसी गौरवशाली परंपरा की कड़ी में शाहपुरा के सेन समाज के प्रतिनिधि दल ने दिगराज सिंह शाहपुरा जी से आत्मीय भेंट कर उन्होंने अपनी गहरी भावनाओं को साझा करते हुए बताया कि शाहपुरा राजपरिवार द्वारा निर्मित सेन मंदिर, जो कभी श्रद्धा, कला और स्थापत्य का अद्भुत संगम था, आज अपनी जर्जर अवस्था में खड़ा है। मंदिर के टूटते हुए शिलाखंडों में अब भी इतिहास की आत्मा सांस ले रही है। सेन समाज के आग्रह के पश्चात सेन मंदिर को पुनः उस गौरव के साथ जीवित करने का पहला कदम दिगराज सिंह जी ने उठाया जो शाहपुरा की पहचान है ।
दिगराज सिंह शाहपुरा ने सेन समाज के इस भावनात्मक आग्रह को हृदय से स्वीकार कर उन्होंने कहा है यह केवल एक मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, आस्था और एकता के पुनर्जीवन का कार्य है। सेन मंदिर हमारे इतिहास की नींव है — जो यह दर्शाता है कि शाहपुरा का हर पत्थर, हर इमारत और हर व्यक्ति सेवा, संस्कार और समर्पण की भावना से जुड़ा हुआ है।