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सिविक सेंस यानी कि नागरिक भावना को बचपन से ही विकसित करने के लिए अभिभावकों को सिविक सेंस अपने दैनिक आचरण में उतारना होगा। जैसा आप करेंगे वैसे ही आपके बच्चे सीखेंगे। बचपन से ही बच्चों को सामाजिक मेल जोल ,सार्वजनिक स्वच्छता, और कानून के नियमों का पालन करने के संस्कार दें । घर पर बड़ों का सम्मान करे। स्वच्छता रखे, पारिवारिक व सामाजिक शिष्टाचार बनाए रखें। संयुक्त परिवार है तो मिल जुल कर रहे। घर में छोटी-छोटी बातें भी सिखाए कूड़ा सही जगह डालना, सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करना, ट्रैफिक नियम का पालन, पड़ोसी के साथ सामाजिक व्यवहार करना आदि के बारे में जागरूक करते रहे।
अगर माता-पिता अपने व्यवहारिक जीवन में नागरिक भावनाओं का पालन करते हैं तो बच्चे बचपन से ही यह सब कुछ सीख जाते हैं और उनका सिविक सेंस अपने आप विकसित होने लगता है। विद्यालय में भी नागरिक जिम्मेदारी ,नैतिक मूल्यों के बारे में सिखाया जा सकता है। सामूहिक स्वच्छता, पौधारोपण कर पर्यावरण की सुरक्षा, विभिन्न प्रकार के खेल जिसमें बच्चे ग्रुप बनाकर खेल को खेल भावना से खेलना सीखे। हारने पर कोई कड़वाहट ना पाले। अगर बड़ा व्यक्ति इधर-उधर थूकता है या कचरा फेंकता है तो बच्चे उसको देखकर वैसा ही सीखेंगे। अतः हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और अपने आचरण में सिविक सेंस का पालन करें तो बच्चे भी वैसा ही सीखेंगे। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)
लेखिका : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।