
गढ़ तो चित्तौड़गढ़।
बाकी सब गढ़ेया
रानी तो पद्मिनी।
बाकी सब रनेया
मौर्य सम्राट चित्रांगद ने सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व में इसकी नींव रखी थी। वह इसको चित्रकूट के नाम से जाना जाता था। आठवीं शताब्दी में बप्पा रावल ने मानमोरी को हराकर किले पर अधिकार किया। यह सिसोदिया राजवंश की राजधानी बनी। 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने किले की घेराबंदी की और राजा रतन सिंह को हरा दिया राजा रतन सिंह की पत्नी रानी पद्मिनी ने अपने सम्मान की रक्षा के लिए 16000 महिलाओं के साथ जोहर किया। अकबर ने 1568 में आक्रमण किया जिसमें जयमल व फत्ता जैसे योद्धाओं ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। महाराणा प्रताप का बचपन इसी किले में बीता था। मीराबाई का विवाह भी यहां के राजा भोज से हुआ था। चित्तौड़गढ़ का दुर्ग ऐतिहासिक स्थलों और स्मारकों का घर है। जो दुनिया भर में पर्यटन के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह किला यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में प्रतिष्ठित है। अपनी जटिल वास्तु कला और ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ यह आन, बान, शान, मीरा की भक्ति और पन्नाधाय के बलिदान
के लिए प्रसिद्ध है। यहां के प्रमुख स्मारक है विजयस्तम्भ, कीर्तिस्तम्भ, गोमुख कुंड, मीरा का मदिर, कालिका माता का मंदिर, तालाब के अंदर बना हुआ पद्मिनी महल आदि।
संकलनकर्ता : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।