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साइबर बुलिंग के नए-नए तरीके देश में बढ़ते जा रहे है। महिलाओं , विशेष कर युवा पीढ़ी को इससे बचने की सख्त जरूरत है। साइबर अपराधी बड़े शातिर होते है। इससे बचने के लिए महिलाएं ऐसे पासवर्ड का उपयोग करें जिसमें अक्षर, संख्याएं,और विशेष वर्ण शामिल हो। अपने मोबाइल में टू – फैक्टर- आर्थिटिफिकेशन सेटिंग्स करें। इसमें सुरक्षा की दोहरी परत होती हैं। फोन की सेटिंग्स में जाकर गोपनीयता सेटिंग्स को ऑफ करें।
महिला अक्सर मोबाइल पर अपनी निजी जानकारी साझा कर देती है। कृपया ऐसा ना करें। कहीं भी घूमने फिरने जाएं उसकी पोस्ट ना डालें। बच्चों की दैनिक गतिविधियों स्कूल आने जाने का समय या ऐसा कोई भी फोटोअपलोड न करें। अपने फोटो सोशल मीडिया पर नहीं डालें। विशेष कर युवतिया नए-नए फोटो सेल्फी लेकर अपने फोटो अपलोड करती है। एआई तकनीक से आपके फोटो का दुरुपयोग हो सकता हैं। आपका फोटो आपके किसी परिचित को दिखा कर आपकी बीमारी के बहाने से उसे आर्थिक रूप से ब्लैकमेल किया जा सकता है। लोकेशन टैग की सुविधा का उपयोग न करें इससे अपराधी को आपकी गतिविधियों का पता चल सकता है।
इंस्टाग्राम, फेसबुक पर ज्यादा सक्रिय न रहे। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें, ना किसी को फ्रेंड रिक्वेस्ट ऑफर करे। अपनी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट ना करें। कोई भी अनजान फोन नंबर रिसीव नहीं करें। किसी भी हालत में अनजान लिंक पर क्लिक न करें।लालच में ना आए। किसी भी विषय पर संबंधित जानकारी के लिए अधिकृत वेबसाइट पर ही जाएं। कोई भी बैंक या ऑफिस ऑनलाइन जानकारी नहीं मांगते हैं। इसलिए फर्जी वेबसाइट और लिंक से बचें। अपना फोन जरा सी देर के लिए भी किसी अनजान के हाथ में ना दे। आपका फोन से डायवर्ट कोड (*21#*62) डायल कर सकते है। आपकी कॉल उसके फोन नंबर पर फॉरवर्ड हो जाती है। वह आपके कॉल सुन भी सकता है और ओटीपी भी चुरा सकता है।तमाम सावधानी के बावजूद भी अगर आपसे को फोन पर कोई बदतमीजी करता है। व्हाट्सएप करता है। धोखाधड़ी होती है, तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दें व साइबर सुरक्षा सेल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर फोन करें। इसमें लापरवाही न बरतें। तत्काल सूचित करने पर अपराधी पकड़ा जा सकता है। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)
लेखिका : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़(राजस्थान)।