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आँधी (जयपुर)। आँधी ग्राम के कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता नदीम खान पठान ने कहा कि ख़्वाजा गरीब नवाज, जिनका असल नाम मोइनुद्दीन हसन चिश्ती थे,13 वीं सदी के एक महान सूफी संत थे। उन्हें “गरीब नवाज” यानी गरीबों का मददगार कहा जाता है। उनका जन्म 1141 ईस्वी में सिस्तान (अब ईरान और अफगानिस्तान का हिस्सा) में हुआ था और उन्होंने अपना जीवन गरीबों, हाशिए पर पड़े लोगों और समाज के कमजोर तबकों की सेवा में समर्पित कर दिया था।
पठान ने कहा कि ख्वाज़ा साहब ने 15 साल की उम्र में अपने पिता की मृत्यु के बाद, उन्होंने अपना जीवन धर्म और ज्ञान की खोज में लगा दिया। ख्वाज़ा ने हजरत उस्मान हारोनी से सूफी ज्ञान प्राप्त किया और बाद में भारत आकर चिश्ती सूफी सिलिले की स्थापना की।
ख्वाज़ा साहब का योगदान:
1192 ईस्वी में अजमेर पहुंचे, जहां उन्होंने लोगों को प्रेम, सहिष्णुता, और मानवता का संदेश दिया। अजमेर शरीफ दरगाह, जो उनकी मजार है, आज दुनिया भर के मुस्लिमों और गैर-मुस्लिमों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। ख्वाज़ा साहब शिक्षाएं दी थी कि “सभी से प्रेम करे, किसी से द्वेष नहीं करे”। उन्होंने समाज में गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों की सेवा को प्राथमिकता दी। ख़्वाजा गरीब नवाज की कहानी हमें प्रेम, सहिष्णुता, और मानवता की शिक्षा देती है। उनकी जिंदगी और शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।