
चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर एक ऐतिहासिक महल है। जिसका निर्माण महाराणा रतन सिंह की रानी पद्मिनी के लिए ग्रीष्मकालीन निवास के लिए बनाया गया था जो पानी के बीच बना है। यह एक दो मंजिला संरचना है। यहां नाव से आना होता था। रानियों के लिए बहुत सुंदर कमरे बने हुए हैं।
इतिहासकारों के अनुसार अलाउद्दीन खिलजी को रानी का दीदार इसी महल से पानी व शीशे के माध्यम से कराया गया था इसे जनाना महल भी कहते हैं तालाब के किनारे मर्दाना महल बने हुए हैं।
पद्मिनी महल मात्र एक इमारत नहीं है। मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, रानी पद्मिनी की सुंदरता, राजपूत महिलाओं के साहस व जौहर की जीवंत कहानी है। मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी की सुंदरता की चर्चा सुनकर उसको पाने के लिए चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर हमला किया और राणा रतन सिंह को कैद कर लिया। लेकिन अलाउद्दीन खिलजी रानी पद्मिनी तक पहुंचता उसके पहले ही रानी पद्मिनी ने 16000 महिलाओं के साथ आग में कूद कर जौहर कर लिया। कोई भी हिंदू राजपूत महिला मुगल शासक के अधीन नहीं होना चाहती थी। इसलिए चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर तीन जौहर हुए। मुगलों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
संकलन : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)