
जाफ़र लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। मशहूर,काबिल, दयालु और भामाशाह मोहन कुड़ी ने कहा कि विश्व मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है, जिस दिन 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया था। यह दिन दुनिया भर में मानवाधिकारों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सभी के लिए समानता, स्वतंत्रता, और गरिमा के मूल सिद्धांतों को बढ़ावा देने का अवसर है।
कुड़ी ने पिछले साल की थीम पर बोलते हुए कहा कि “असमानताओं को कम करना और मानव अधिकारों को आगे बढ़ाना” जो मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के महत्व पर प्रकाश डालती है और सभी देशों और लोगों को इन अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करती है।
कुड़ी ने कहा कि यह दिन हमें याद दिलाता है कि हर इंसान को समान अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, चाहे उनकी जाति, धर्म, लिंग, या स्थिति कुछ भी हो। यह मानवाधिकारों की रक्षा और सम्मान के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
कुड़ी ने कहा कि दुनिया भर में इस दिन को मानवाधिकार प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, और जागरूकता अभियानों के माध्यम से मनाया जाता है। सरकारें, गैर-सरकारी संगठन, और आम लोग मानवाधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने और उनके संरक्षण के लिए कार्य करते हैं।