अजमेर में 814वां उर्स, प्रेम, मानवता और साम्प्रदायिक एकता का प्रतीक

जाफ़र लोहानी
ww.daylifenews.in
मनोहरपुर (जयपुर)। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती, जिन्हें गरीब नवाज के नाम से दुनिया जानती है, का 814वां उर्स आज से शुरू हो गया है। अजमेर शरीफ दरगाह पर झंडे की रस्म के साथ, यह पवित्र आयोजन प्रेम, मानवता, और साम्प्रदायिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा है।
“ख्वाजा का दर सबका दर” — यह नारा आज भी हजारों जायरीनों के दिलों में गूंज रहा है, जो अजमेर की सड़कों पर उमड़े हैं। सूफी संत की यह दरगाह सदियों से एक ऐसा केंद्र रही है, जहां हर धर्म, जाति, और पृष्ठभूमि के लोग आकर एक हो जाते हैं।
उर्स का संदेश: प्रेम और भाईचारा
ख्वाजा गरीब नवाज ने सदियों पहले कहा था, “मोहब्बत सबको सब से है, नफरत किसी से नहीं।” उनका यह पैगाम आज भी लोगों को जोड़ता है।
814वें उर्स में, जब जन्नती दरवाजा 21 दिसंबर को खुलने वाला है, दरगाह परिसर एक आध्यात्मिक समुद्र में बदल जाएगा।
सवा मण भंडारा:
गरीब नवाज की परंपरा के अनुसार, सवा मण (लगभग 50 किलो) अनाज का विशाल भंडारा होगा, जिसे जरूरतमंदों में बांटा जाएगा। यह गरीबी हटाने और समृद्धि फैलाने का प्रतीक है।
संदल उतारने की रस्म:
20 दिसंबर की रात 8 बजे, पवित्र संदल उतारा जाएगा, जिसे भीलवाड़ा का गौरी परिवार 82 साल से निभा रहा है। यह रस्म सूफी संत की सेवा और भक्ति का अद्वितीय उदाहरण है।
मलंगों का जुलूस: उर्स में शामिल होने वाले मलंग, अपनी रंगीन पोशाक और ढोल-नगाड़ों के साथ, गरीब नवाज की दर पर अपनी हाजिरी लगाएंगे।
ख्वाजा का दर — सबका दर
यह उर्स सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश है। सूफी संत की दरगाह पर मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई — सभी आते हैं, क्योंकि यहां सबकी दुआएं सुनी जाती हैं। यह एक ऐसा केंद्र है, जहां राजनीति, जाति, और धर्म की दीवारें टूट जाती हैं।
नन्दा अज़ीज़ व स्थानीय निवासी, कहती हैं:
गरीब नवाज की दरगाह हमारे शहर का दिल है। यहां आकर हमें लगता है, सारे गिले-शिकवे दूर हो गए।”
खास आकर्षण:
झंडा रस्म: पारंपरिक ढोल – नगाड़ों और “या गरीब नवाज” के नारों के बीच, उर्स का आगाज हो गया।,
जन्नती दरवाजा: दिसंबर को खुलने वाला यह दरवाजा मान्यता के अनुसार, मन्नतें पूरी होने का प्रतीक है।
अमल महफिल और कव्वाली: 26 दिसंबर को रात भर चलने वाली इस महफिल में, सूफी गायन गरीब नवाज की महिमा का गुणगान करेगा।
पुलिस और प्रशासन की तैयारियां:
सुरक्षा के कड़े इंतजाम के साथ, जायरीनों के लिए विशेष सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।, ख्वाजा का संदेश आज भी प्रासंगिक क्यों? गरीब नवाज ने कहा था, मैं गरीबों का आश्रय हूँ, मेरा दर हर किसी के लिए खुला है।

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