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जयपुर। क्रिसमस दिवस के पावन अवसर पर राजस्थान प्रदेश में शांति, सौहार्द, आपसी भाईचारे एवं संविधान प्रदत्त मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से धर्म रक्षा एवं संविधान रक्षा संघर्ष समिति, राजस्थान के बैनर तले “क्रिसमस सद्भावना कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
इस क्रम में होटल आरको पैलेस, सिंधी कैंप, जयपुर में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने विचार रखे।
कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. दशरथ हिनूनिया, संयोजक धर्म रक्षा एवं संविधान रक्षा संघर्ष समिति, राजस्थान एवं प्रदेश अध्यक्ष आंबेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया, राजस्थान ने कहा कि भारत की पहचान धर्मनिरपेक्षता, आपसी सम्मान और संविधान में निहित मूल्यों से है।
क्रिसमस जैसे पर्व समाज को प्रेम, करुणा और भाईचारे का संदेश देते हैं, और ऐसे समय में सद्भाव को मजबूत करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में धार्मिक स्वतंत्रता, विचार की आज़ादी और नागरिक अधिकारों की रक्षा अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी समुदाय में भय या असुरक्षा का वातावरण न बने।
डॉ. नरेन्द्र बौद्ध संयोजक धर्म रक्षा एवं संविधान रक्षा संघर्ष समिति, राजस्थान एवं अध्यक्ष यूथ बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया, वाई बी एस, ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का संविधान सभी धर्मों को समान सम्मान देता है और संविधान की रक्षा ही वास्तविक राष्ट्र सेवा है। मैं अपने आप को ही ले लेता हूं, यदि मुझे नफरत को खत्म करना है। तो सबसे पहले अपने आप पर ही काम करना होगा मुझे अपने आपको देखने की आवश्यकता है। कि मैं कितना बुरा हूं. और कितना अच्छा हूं। जब मुझे इस चीज का ज्ञान हो जाएगा कि सच में ही मैं कितना बुरा हूं या फिर कितना अच्छा हूं। तो मैं अपने अंदर सुधार स्वयं ही ला सकता हूं। कोई दूसरा मेरे अंदर सुधार नहीं ला सकता। मैं स्वयं ही अपने बुरे कर्मों और गलतियों को दूर कर सकता हूं। तो उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने ऊपर काम करने की आवश्यकता है। अपने अंदर झांकने की आवश्यकता है अपने आप को पहचानने की आवश्यकता है तब जाकर इस नफरत को खत्म किया जा सकता है। आज समाज की भेदभावपूर्ण अव्यवस्था के कारण दुखी मनुष्य की पीड़ा बहुत अधिक बढ़ कर पहाड़ के समान विशाल हो गई है। अब इस पीड़ा को उसी प्रकार पिघल जाना चाहिए जिस प्रकार हिमालय पर निरंतर ऊंची होती हुई बर्फ पिघल जाती है। और उससे गंगा नदी बहने लगती है। वर्तमान में हमारे देश के सामाजिक जीवन में व्याप्त अव्यवस्थाओं की दीवार परदों की तरह भले ही हिलने लगी है। किंतु अभी और सुधार की आवश्यकता है। सामाजिक उन्नयन के लिए इस बात की शर्त थी कि भेदभाव की दीवार बुनियाद तक हिल जाए ताकि सामाजिक एकता संभव हो सके।
इस अवसर पर अब्दुल लतीफ आरको (मुस्लिम एकता मंच) ने कहा कि सभी धर्म मानवता, शांति और प्रेम का संदेश देते हैं, और संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। धार्मिक सौहार्द बनाए रखना देश की मजबूती का आधार है।
प्रवेल भाई (क्रिश्चियन मरु भूमि समिति) ने कहा कि क्रिसमस का संदेश नफरत नहीं, बल्कि प्रेम और सेवा है। उन्होंने सभी समुदायों से मिलकर शांति और भाईचारे के वातावरण को सशक्त बनाने की अपील की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनमोर्चा राजस्थान ने अपनी बात कहते हुए कहा डॉ. अंबेडकर विचार मंच के प्रतिनिधि ‘मेहता राम काला’ तथा अन्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि धर्म के नाम पर समाज को बॉटने के बजाय संविधान के तहत शांति, सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया जाना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ‘क्रिसमस सद्भावना कॉन्फ्रेंस’ किसी एक धर्म का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए शांति, भाईचारे और संविधान की रक्षा का साझा मंच है।