बीते वर्ष मेरे जीवन की अमूल्य थाती हैं — ज्ञानेन्द्र रावत

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गाजियाबाद। जीवन एक अनसुलझी पहेली है। जीवन के बीते 74 वसंत में मुझे हर क्षण सत्य-असत्य, प्रेम-घृणा, लगाव-दुराव, सहिष्णुता – असहिष्णुता, स्वार्थ एवं निस्वार्थता, मानवीय – अमानवीय, नैतिकता – अनैतिकता, ईमानदारी और बेईमानी, दायित्व और कर्त्तव्य बोध एवं अपने – पराये का भेद जानने- समझने का सुअवसर मिला है। इस दौरान वह चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, सामाजिक क्षेत्र हो, पत्रकारिता का हो या फिर पर्यावरण का क्षेत्र हो, आदि में परिजनों – मित्र-बांधवों और हितैषियों के तरल स्नेह और अगाध प्रेम का सौभाग्य भी मिला। यह मेरे जैसे एक छोटे और साधारण व्यक्ति के लिए गर्व और सम्मान का विषय है।
इस दौरान गत वर्ष लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र और ग्रीन फाउंडेशन ट्रस्ट का जिन्होंने प्रख्यात लोकतंत्र सेनानी जेपी मैमोरियल लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और प्रख्यात पर्यावरण एवं जल विज्ञानी श्री कृष्ण गोपाल व्यास स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड के अलावा विगत वर्षों में सिद्धू- कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय द्वारा भगवान बिरसा मुण्डा मैमोरियल अवार्ड, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी स्मृति संस्थान द्वारा प्रख्यात पर्यावरणविद अनुपम मिश्र स्मृति पुरस्कार, जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी जी.सी. टोपीवाला फाउंडेशन, भागलपुर द्वारा अमर शहीद तिलका मांझी अवार्ड, पीपल मैन फाउंडेशन द्वारा बाबा आमटे मैमोरियल अवार्ड एवं महात्मा गांधी मैमोरियल अवार्ड, एलपीएस विकास संस्थान, अलवर द्वारा मां अमृता देवी स्मृति राष्ट्र रत्न सम्मान, ग्रीन सोसाइटीज आफ इंडिया द्वारा पर्यावरण भूषण सम्मान, ईएसडीए द्वारा वर्ल्ड इनवायरमेंट कांफ्रेंस में इनवायरमेंट एक्सीलेंसी अवार्ड, जीकेसी द्वारा महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान, राजकीय कृषि एवं विज्ञान प्रदर्शनी, एटा में अखिल भारतीय पत्रकार सम्मेलन द्वारा महान क्रांतिकारी गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार एवं एस्रो द्वारा पर्यावरण के पुरोधा सम्मान से मुझे सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त उन सभी संस्थाओं का भी मैं हृदय से आभारी हूं जिन्हौंने मुझे समय- समय पर सम्मानित- पुरस्कृत कर गौरवान्वित किया। इस हेतु मैं उन सभी का ऋणी हूं।
हां इस दौरान जो सबसे खास बात रही कि जीवन के छठे और सातवें दशक में कुछ ऐसे बहुमुखी विलक्षण प्रतिभावान युवाओं और ऊर्जा के धनी व्यक्तियों – अधिकारियों का साहचर्य – सहयोग- समर्थन और आदर – सम्मान मिला, जिससे मैं धन्य हो गया। वे अविस्मरणीय तो हैं ही, वह मेरे जीवन की अमिट धरोहर हैं। थाती हैं। आज मैं अपने जीवन के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा हूं। यह मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य का, आनंद और हर्षातिरेक का विषय है और एक अभूतपूर्व उपलब्धि भी। मैं जीवन के 75वें वर्ष में आप सभी के तरल स्नेह और आशीर्वाद का आकांक्षी हूं। भविष्य में पूर्व की भांति आपकी आशा – आकांक्षाओं पर खरा उतरने का भरसक प्रयास करूंगा। सद्भावनाओं सहित। सादर। ससम्मान।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार, प्रख्यात पर्यावरणविद और सामाजिक कार्य कर्ता हैं। उपरोक्त विचार उन्होंने अपने जीवन के 75वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर दिये साक्षात्कार में व्यक्त किये हैं।)

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