मन का बसन्त तो उपवन का बसन्त भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है – सोनी

जाफ़र लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। लोहानी न्यूज सर्विस के संचालक जाफ़र लोहानी ने बसंत पंचमी पर जनता से वार्तालाब की कि आज का बसन्त कहा पर है इस पर कुछ लोगो ने अपनी अपनी निम्न राय दी है
भामाशाह डी के सोनीने कहा कि मन का बसन्त तो आंतकवाद और उपवन का बसन्त भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। यह एक बहुत ही गहरा और चिंताजनक बयान है, जो हमारे समाज की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है।
सोनी ने कहा कि आंतकवाद और भ्रष्टाचार दोनों ही हमारे समाज के लिए बड़ी चुनौतियाँ हैं, जो हमारे विकास और प्रगति को रोक रही हैं। आंतकवाद हमारे समाज में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है, जबकि भ्रष्टाचार हमारे समाज के मूल्यों और नैतिकता को नष्ट करता है।
मनोहरपूर व्यापार मण्डल के अध्यक्ष महेंद्र कुमार गुर्जर ने कहा कि पहले सरसो के खेत में जाकर हंसी मजाक करना और एक दूसरे के दुःख दर्द में काम आने का रिवाज अब खत्म हो गया है। यह एक बहुत ही दुखद बात है, क्योंकि यह रिवाज हमारे समाज में भाईचारे और एकता का प्रतीक था।
सरसो के खेत में जाकर हंसी मजाक करना एक ऐसा समय था जब लोग अपने दुःख दर्द को भूलकर एक दूसरे के साथ खुशियाँ मनाते थे। यह एक ऐसा अवसर था जब लोग अपने काम छोड़कर एक दूसरे के साथ समय बिताते थे और अपने रिश्तों को मजबूत बनाते थे।
भाजपा नेता महिपाल सिंह गुर्जर ने कहा कि बसन्त पंचमी पर सभी जाती के लोग सितोलिया, कब्बडी, खो खो आदि खेलते थे और एक दूसरे के मंदिर मस्जिद में आते जाते थे। यह एक बहुत ही सुंदर और भाईचारे का समय था, जब लोग अपने मतभेदों को भूलकर एक दूसरे के साथ खुशियाँ मनाते थे।
अब ऐसा भाईचारा नहीं है, यह एक बहुत ही दुखद बात है। हमारे समाज में भाईचारे और एकता की कमी हो गई है, जो हमारे विकास और प्रगति के लिए बहुत जरूरी है। मजदूर नेता अब्दुल अज़ीज़ लोहानी ने कहा कि बसन्त ये सन्देश देता है कि आपसी प्रेम स्नेह व भाईचारा बनाए रखे एक दूसरे की मदद करे खुशहाल रहे।

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