
लेखक : ज्ञानेन्द्र रावत
लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरणविद हैं।
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आजकल देश में 26वें गणतंत्र दिवस समारोह की धूम है। इसके लिए देश की राजधानी दिल्ली सजी हुयी है। जाहिर है इस दौरान देश की चहुंमुखी प्रगति के साथ-साथ देश की संस्कृति, सैन्य क्षमताओं और विकास योजनाओं की झांकियों का प्रदर्शन होगा जिसपर हर भारतीय को गर्व होना स्वाभाविक है।
यहां विचारणीय यह है कि क्या इसके साथ-साथ हमें इसपर भी गर्व का अनुभव करना चाहिए कि इतनी खासियत वाली दिल्ली पिछले तीन महीने से साफ हवा के लिए क्यों तरस रही है। गौरतलब यह है कि इस दौरान एक दिन भी ऐसा नहीं रहा जबकि वायु गुणवत्ता का स्तर 200 से कभी नीचे आया हो। यह सिलसिला बीती 14 अक्टूबर से बराबर जारी है। इस दौरान ऐसा कभी भी नहीं रहा जबकि हवा में मौजूद प्रदूषक कणों का स्तर साफ-सुथरी श्रेणी में आया हो। असलियत यह है कि दिल्ली चार गुणा से भी ज्यादा प्रदूषण से जूझ रही है। राजधानी के अधिकांश इलाकों में एक्यूआई 400 का आंकड़ा पार कर गया है और कुछ इलाकों में तो यह आंकड़ा 488 के भी पार पहुंच गया है। सीपीसीबी इसकी पुष्टि करती है।


जाहिर है यह वायु गुणवत्ता सूचकांक की अति गंभीर स्थिति है। मजबूरन सरकार को निर्माण कार्यों और ट्रकों के प्रवेश पर रोक के साथ ग्रेप 4 लागू करना पड़ा । अब सरकार निजी वाहनों की भीड़ कम करने की गरज से आने वाले 4 सालों में 14,000 ई बसें चलाने पर विचार कर रही है ताकि प्रदूषणपर अंकुश लगाया जा सके। हकीकत यह है कि दिल्ली के लोग गैस चैम्बर में रहने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में अब वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालिक उपायों की योजना पेश की है। शीर्ष अदालत ने प्रदूषण की भयावह स्थिति को मद्देनजर यह साफ कर दिया है कि वह अब आयोग की सिफारिशों पर किसी भी प्रकार की आपत्ति पर विचार नहीं करेगा और हालात की भयावहता को देखते हुए अब आयोग की सिफारिशों को तत्काल लागू करने की जरूरत है। हालात की भयावहता सरकार की लापरवाही का ही सबूत है क्योंकि प्रदूषण नियंत्रण की योजनाओं पर यदि बीते सालों में काम हुआ होता तो स्थिति इतनी बदहाल नहीं होती और स्थिति में काफी बदलाव नजर आता।


पीने के पानी को लें तो दिल्ली के निवासियों को साफ और शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। सच कहा जाये तो यहां की तकरीब 30 फीसदी आबादी धीमा जहर पीने को मजबूर है। स्वच्छ पानी दिल्ली वालों के लिए सपना बन गया है। जाहिर है दूषित जल दिल्ली वालों को बीमार बना रहा है। हकीकत में दिल्ली का पानी 24 फीसदी लोगों की मौत की वजह बन रहा है। दूषित पानी में मौजूद वैक्टीरिया, वायरस और परजीवी बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए सर्वाधिक खतरनाक साबित हो रहे हैं। पानी में केवल जीवाणु ही नहीं, फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सैनिक आदि खतरनाक रसायन गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि दूषित पानी बार-बार हो रहे दस्त, पेटदर्द, बच्चों में कुपोषण और उनके शारीरिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है। दूषित पानी से लिवर, किडनी और हड्डियों को काफी नुकसान होता है। राजधानी के अस्पतालों में पिछले दिनों से दूषित पानी से होने वाली बीमारियों खासकर डायरिया, उल्टी-दस्त, टायफायड, हैपेटाइटिस-ए और ई, पेट के संक्रमण और बच्चों में डिहाइड्रेशन के मामले के मरीजों की तादाद तेजी से बढी है। एम्स दिल्ली में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डा. संजय राय की मानें तो पानी में मिले हैवी मैटल शरीर के हरेक अंग के लिए हानिकारक हैं। इनसे किडनी डैमेज होने, हृदय रोग के अलावा त्वचा और लम्बे समय तक शरीर में इनके पहुंचने पर कैंसर भी हो सकता है। यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।


सच्चाई यह है कि दिल्ली जल बोर्ड का पानी अक्सर दूषित आता है, इसी वजह से जलजनित बीमारियों का हरसमय खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि जल बोर्ड के पानी का इस्तेमाल तो वे केवल नहाने या कपड़े धोने में ही करते हैं। खाना बनाने या पीने के लिए नहीं। सबसे चिंतनीय बात यह है कि राजधानी का भूजल भी प्रदूषित है। इसमें कूड़े के पहाड़ की अहम भूमिका है। गत दिनों दिल्ली विधान सभा में विधायकों ने अपने इलाकों में सालों से दूषित पानी की आपूर्ति का मामला उठाया।


दिल्ली सरकार के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने भी माना कि दिल्ली में जर्जर पाइप लाइन से पेयजल दूषित हो रहा है। उनका कहना है कि अब राजधानी की पानी की पुरानी पाइप लाइन बदली जायेंगी। इससे दूषित पानी की समस्या दूर होगी। यह हालत तब है जबकि जनकपुरी, आनंद विहार, योजना विहार आदि में दूषित पानी की आपूर्ति के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट और एनजीटी कई बार अपनी नाराजगी जता चुके हैं। सरकार का दावा है कि दिल्ली में 93 फीसदी घरों में नलों से पेयजल की आपूर्ति की जाती है। लेकिन हकीकत में संगम विहार, देवली सहित बहुतेरी अनधिकृत कालोनियों व झुग्गी बस्तियों में पानी का कनेक्शन ही नहीं है। बाहरी दिल्ली के बहुतेरे इलाकों में तो नियमित पानी की आपूर्ति होती ही नहीं है और यदि आता भी है तो वह इतना गंदा कि उससे हाथ भी धोये नहीं जा सकते, पीने का तो सवाल ही कहां उठता है। सरकार का दावा कि राजधानी में पानी व सीवर की व्यवस्था सुधारने हेतु 68 विधान सभा क्षेत्र में 734 करोड़ की राशि दी गयी है। फिर भी हालात पहले से बदतर हैं। मोटर चलाने पर सीवर का बदबूदार पानी आने की शिकायतें आम हैं। रघुवीर नगर की एच एम टी कालोनी इसकी जीती जागती मिसाल है। लापरवाही का आलम यह है कि किराडी जैसी कई कालोनियों के लोग महीनों से जलभराव के कारण नारकीय हालात में जीने को मजबूर हैं। किराडी में लोग घुटनों तक कीचड युक्त गंदे बदबूदार पानी के बीच लांग बूट पहनकर गलियां पार कर रहे हैं। गंदे और बदबूदार पानी के कारण उनका घर से बाहर निकलना और सांस लेना दूभर हो गया है। अब कहा जा रहा है कि दिल्ली का जलापूर्ति का बदहाल नेटवर्क सुधारने हेतु 30 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है।

दिल वालों की दिल्ली की बदहाली का आलम देखिये, यहां कहीं नालों की दीवार और पुलिया टूटी हैं, कहीं गड्ढों की भरमार है, कहीं डिवाइडर टूटे पड़े हैं, कहीं फुटपाथ और डिवाइडर पर पेंट नहीं है, इससे रात में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, कहीं स्ट्रीट लाइटें महीनों से खराब पड़ी हैं, कहीं वे पेड़ों के बीच छिपी हुयी हैं, इससे आयेदिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है,कहीं-कहीं खतरनाक कट हैं, अंधेरे में न दिख पाने के चलते और कहीं सड़क सुरक्षा के इंतजाम न होने, यू टर्न, फ्लाई ओवर और सर्विस लेनों के खतरनाक प्वाइंट पर रिफलैक्टर और दिशासूचक चिन्ह न होने तथा बैरियर टूटे होने से वाहनों के टकराने की घटनायें आम हैं, ये हालात नजफगढ, जल विहार, रानी खेडा, मुंडका, किराडी, मुबारकपुर डबास ,सतबडी जैसे इलाकों की ही नहीं है, सरोजिनी नगर, बहादुर शाह जफर मार्ग, आई टी ओ, आई पी एस्टेट,स्काई चौक, पटपडगंज, ईस्ट गुरू अंगदनगर, छतरपुर, कालिंदी कुंज, शास्त्री पार्क, वैलकम, जाफराबाद, खजूरी और शाहदरा ,गाजीपुर, मयूर विहार, कोंडली, ओखला भी इन समस्याओं से जूझ रहे हैं। गौरतलब यह है कि जब इन इलाकों का यह हाल है तो उस हालत में अनधिकृत और झुग्गी-झोंपड़ी कालोनियों की हालत क्या होगी। ऐसा लगता है देश की राजधानी दिल्ली के लोगों का कोई पुरसाहाल है ही नहीं। अब तो वह किसी भगीरथ रूपी ताड़नहहार की बाट जोह रही है जो आये और उसे इन समस्यओं से मुक्ति दिलाये ताकि वह चैन की सांस ले सकें।
(लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)