विश्व विख्यात शोध संस्थान पर आधारित फोल्डर का विमोचन जयपुर में होगा

www.daylifenews.in
जयपुर। मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान की अहमियत एवं आवश्यकता को प्रतिपादित करते हुए एक फोल्डर का विमोचन शनिवार को झोटवाड़ा जयपुर स्थित फॉर्च्यून एलिवेट होटल में सुबह 11 बजे किया जाएगा। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बीएल शर्मा होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्ष मोहम्मद हनीफ सेवानिवृत जज करेंगे। इस मौके पर रिटायर्ड जज अयूब खान, टोंक प्रोग्रेसिव कमेटी के सरंक्षक व संयोजक सरताज अहमद एडवोकेट, कमेटी के सदर मुफ्ती आदिल नदवी सहित कई प्रबुद्धजन मुख्य रूप से मौजूद रहेंगे। इस मौके पर विश्व विख्यात मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान की अहमियत व वर्तमान में आवश्यकता पर विचार विमर्श किया जाएगा। साथ ही इस संस्थान के रिक्त पदों को लेकर सरकार को भी अवगत कराए जाने व कानूनी स्तर पर क्या हो सकता है उस पर भी विमर्श होगा।
राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक महत्व बरकरार रखने के लिए आयोजित
यह कार्यक्रम विश्व विख्यात शोध संस्थान की विरासत को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास है। संस्थान, जो राजस्थान के टोंक जिले में स्थित है, 1978 में राजस्थान सरकार द्वारा स्थापित किया गया था और 1981 में इसका नाम मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान (MAAPRI) रखा गया। यह संस्थान अरबी, फारसी, संस्कृत, उर्दू साहित्य, इतिहास, इस्लामी अध्ययन, सूफीवाद, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दुर्लभ पांडुलिपियों (manuscripts) का संरक्षण करता है। यहां लगभग 8 हजार से अधिक दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ संरक्षित हैं, जिनमें से कई सदियों पुराने हैं। ये ग्रंथ इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए अमूल्य धरोहर हैं।
संस्थान की स्थापना टोंक के नवाबों द्वारा संग्रहीत ग्रंथों, भाषाई साहित्य और शासकीय रिकॉर्ड्स को संरक्षित करने के उद्देश्य से हुई थी। यह विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है, जहां 50 से अधिक देशों के शोधार्थी आ चुके हैं। इससे इसके महत्व का अंदाज़ा बखूबी लगाया जा सकता है।
ये संस्थान न केवल प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करते हैं, बल्कि सांस्कृतिक विविधता, हिंदू-मुस्लिम एकता और ऐतिहासिक समझ को मजबूत करते हैं। वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, बहुभाषी साहित्य के अध्ययन और पूर्वाग्रहों से मुक्त इतिहास बोध के लिए यह संस्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दुर्भाग्य से, संस्थान वर्तमान में कर्मचारियों की कमी और रिक्त पदों से जूझ रहा है। यह अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है, क्योंकि 30 वर्षों से महत्वपूर्ण पदों पर कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई है। इससे दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण, शोध कार्य और डिजिटल प्रयास प्रभावित हो रहे हैं। कार्यक्रम में इसी मुद्दे पर गहन चर्चा होगी, जिसमें सरकार को पत्र लिखने, कानूनी विकल्पों (जैसे सेवा नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया तेज करने या उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने) पर विचार किया जाएगा।
यह कार्यक्रम न केवल संस्थान की अहमियत को रेखांकित करेगा, बल्कि इसकी सुरक्षा और विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की शुरुआत भी साबित होगा। ऐसे प्रयास राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का खजाना सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। (Pressnote)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *