
विमर्श शुल्क पर सदन में हंगामा
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जयपुर। प्रदेश के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में विद्यार्थियों से लिए जा रहे ₹1000 के “विमर्श शुल्क” को लेकर विधानसभा में तीखी बहस और गहमागहमी देखने को मिली।
शाहपुरा से कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
गोरतलब है कि मत्स्य विश्वविद्यालय, मोहन लाल सूखाडिया व राजस्थान विश्वविद्यालय में तत्कालीन कुलपतियों द्वारा नियम विरूद्ध 2016-17, 2017-18 व 2019-20 से छात्रो से विमर्श शुल्क के नाम पर मनमाने तरीक़े से 1000 रुपये लिये जा रहे है जिसको लेकर शाहपुरा से कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने सवाल किया ।
जवाब में मंत्री प्रेम चंद बैरवा ने बताया कि यह शुल्क राजऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय द्वारा 2018-19 से 24-25 तक 22.16 करोड़ तथा मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में 2020-21 से 24-25 तक 43.16 करोड़ तथा राजस्थान विश्वविद्यालय में 2017-18 से 24-25 तक 156.18 करोड़ की राशि वसूल की गई है। अर्थात् लगभग 22.50 लाख विद्यार्थियों से करीब ₹223 करोड़ की राशि वसूल की गई, जिसका उपयोग परीक्षा संबंधी कार्यों में किया गया।
इस पर विधायक मनीष यादव ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जब परीक्षा शुल्क अलग से लिया जाता है, तो “विमर्श शुल्क” का उपयोग परीक्षा कार्यों में कैसे किया गया? उन्होंने मांग की कि बताए जाएं—कितने विमर्श केंद्र स्थापित हुए, कितने विद्यार्थियों को विमर्श अथवा परामर्श दिया गया तथा विमर्श शुल्क की राशि को किस मद में खर्च किया गया और उसका विस्तृत लेखा-जोखा सदन की मेज पर रखा जाए।
मंत्री द्वारा इसे विश्वविद्यालयों के अधिनियम का विषय बताने और स्पष्ट जानकारी न दे पाने पर विपक्ष ने सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।
विधायक यादव ने कहा कि एक तरफ़ आप जवाब में विमर्श शुल्क को परीक्षा शुल्क का पार्ट बताते हो दूसरी और इसको विद्यार्थियों के विमर्श व मार्गद्रशन के लिये लेने की बात करते हो इसके खर्च का स्पष्ट ब्योरा आपके पास नहीं है।
ना ही सव्यंपाठी विद्यार्थियों से विमर्श शुल्क लेने का विश्वविद्यालय एक्ट में कोई प्रावधान है और यदि है तो सदन में प्रस्तुत करे।
इस मंत्री विश्वविद्यालय एक्ट के बजाय आदेश पढ़ने लग गये जिस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि आप तो आदेश पढ रहे हो मंत्री जी एक्ट बताओ जिसके अनुसार विमर्श शुल्क वसूल रहे हो दूसरी और आप सदन को गुमराह कर रहे हो पूर्व में माननीय विधायक मनीष यादव के लगाये गये अतारांकित प्रश्न के उत्तर में तिथियों को लेकर अलग जानकारी दी गई थी, जिससे सरकार की स्थिति विरोधाभासी प्रतीत होती है।
नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली व विधायक यादव ने स्वयंपाठी विद्यार्थियों से कथित रूप से लिए जा रहे इस अवैध विमर्श शुल्क को तत्काल बंद करने तथा पूर्व में वसूल की गई राशि विद्यार्थियों को लौटाने की मांग की। सदन में इस मुद्दे पर लंबे समय तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
विधायक मनीष यादव ने कहा कि यह खुले रूप से 22.50 लाख विद्यार्थियों की जेब पर डाका डाला गया है। 223 करोड़ में से एक रुपया भी वास्तविक विमर्श पर खर्च होने का प्रमाण सरकार या विश्वविद्यालय नहीं दे पाए।
विधायक ने इसे वित्तीय नियमों का घोर उल्लंघन बताते हुए कहा कि बिना आय-व्यय विवरण के शुल्क वसूली छात्रों के साथ धोखा है। विधायक ने महामहिम राज्यपाल से हस्तक्षेप कर जांच कराने, शुल्क तत्काल बंद करने और वसूली गई राशि विद्यार्थियों को लौटाने की मांग की।