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ग्वालियर। सुलतानपुर ज़िले के यू.पी.एस. कैथाना गोरसरा मोतिगरपुर में कार्यरत सरकारी शिक्षक अरुण कुमार प्रजापति आज शिक्षा जगत में एक मिसाल बन चुके हैं। वे केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यालय के बाद आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निःशुल्क पढ़ाते हैं। उनका मानना है कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो गरीबी की दीवारें तोड़ सकती है।
उनकी मेहनत का असर आँकड़ों में साफ दिखता है। एन.एम.एम.एस.ई. परीक्षा में अब तक 150 से अधिक छात्र सफल हुए हैं और उन्हें प्रतिवर्ष 12,000 रुपये की छात्रवृत्ति मिल रही है। यह राशि इन बच्चों को आगे की पढ़ाई में सहारा देती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है। वहीं श्रेष्ठा परीक्षा में लगभग 25 विद्यार्थियों का चयन हुआ है, जो अब देश के प्रतिष्ठित सीबीएसई विद्यालयों—जैसे सनबीम स्कूल रोहनिया, लिटिल फ्लावर सीनियर सेकेंडरी स्कूल वाराणसी, ब्रह्मानंद पब्लिक स्कूल बुलंदशहर, दिल्ली पब्लिक स्कूल हरियाणा आदि—में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन बच्चों का जीवनस्तर सुधर रहा है और उनके माता-पिता गर्व से भर उठे हैं।
इसके अलावा, उनके मार्गदर्शन से एक छात्र नवोदय विद्यालय में चयनित हुआ और दो छात्रों ने राधेश्याम त्रिपाठी छात्रवृत्ति परीक्षा में सफलता पाई है। इस छात्रवृत्ति से उन्हें कक्षा 9 से 12 तक क्रमशः 9,000 से 12,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलेगी। अरुण कुमार प्रजापति की निःस्वार्थ सेवा ने शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे बच्चों के सपनों और परिवारों की खुशियों से जोड़ दिया है। वे साबित करते हैं कि एक सच्चा शिक्षक समाज की दिशा बदल सकता है। इसी विचार दृष्टिकोण को जमीन पर लाने के लिए प्रयासरत अरुण प्रजापति को गोपाल किरन समाजसेवी संस्था द्वारा पॉन्डचेरी विश्वविद्यालय में ग्लोबल आइकॉन प्रेस्टिज अचीवर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया।