अय्यप्पा संगम विवादों के घेरे में

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रका, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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आम तौर पर वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोग अपने आपको को नास्तिक कहते है . वे मानते है कि धर्म एक चूर्ण है जिसके नाम पर पूंजीवादी व्यवस्था गरीबों का शोषण करती रही है . इसलिए जब केरल के वाम मोर्चा सरकार ने पिछले महीने राज्य में विश्व अय्यप्पा संगमम ( संगम) आयोजित करने की घोषणा कि तो राजनीतिक हलकों में आश्चर्य व्यक्त किया गया था. राज्य में अगले साल के शुरू में विधानसभा होने वाले है . यह कहा गया कि ऐसे धार्मिक आयोजन के जरिये वामपंथी मोर्चा हिन्दू वोटों को जीतने के कोशिश में है .यह पूरी तरह से एक सरकारी आयोजन था . जिसमें विश्व के कई हिन्दू संगठनों, विशेषकर अय्याप्पा , जो श्रीकिर्षण के अवतार माने जाते है ,के भगतों को आमंत्रित किया गया था. इस संगम का आयोजन पहले दिन से ही विवादों के घेरे में आ गया था . अब यह विवाद आयोजन होने के बाद अभी भी जारी है.
इस आयोजन , जो सितम्बर के तीसरे हफ्ते हुआ, का स्थल पम्पा रखा गया था . यह वह स्थान है जहाँ से पहाडी पर स्थित सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर तक जाने की चढ़ाई शुरू होती है . इस जगह का अपना ही एक धार्मिक महत्व है. वामपंथी मोर्चे की सरकार ने घोषणा की कि यह एक शुद्ध धार्मिक आयोजन है तथा इसका राजनीति कुछ लेना देना नहीं है . लेकिन सच्चाई यह है कि यह आयोजन हिन्दू वोटों को साधने के अलावा और कुछ नहीं था . वाम मोर्चे के घटकों को मुस्लिम तथा ईसाई मतों के तुलना में हिन्दू वोट कम मिलते रहे है . जब इस आयोजन के घोषणा की गई तो कई हिन्दू संस्थायों ने इसका विरोध किया था. लेकिन हिन्दू संडे एक सबसे प्रभावी संगठन नायर सर्विस सोसाइटी ने इसका समर्थन किया था .
इसको लेकर बात केरल हाई कोर्ट तक पहुँची . एक याचिका जरिये इस आयोजन पर रोक लगाये जाने की मांग की गई थी. राज्य सरकार ने यह कहा तक कहा कि इस आयोजना पर सरकारी धन खर्च नहीं किया जायेगा . इस आयोजन के कई प्रायोजकों और विज्ञापन दातायों मिलाने वाला धन इस पर खर्च होगा है .अगर सरकार कुछ अपना अपना धन खर्च भी किया गया तो यह एक निश्चित अवधि में लौटा दिया जायेगा .
आज़ादी से पहले केरल में त्रावनकोर एक बड़ी रियासत थी . रियासत के मदिरों के प्रबंधन के लिए एक त्रावनकोर धर्म बोर्ड बना हुआ था . बाद में केरल की सरकार ने इसे बोर्ड का अधिग्रहण कर लिया तथा राज्य के सभी सरकारी प्रबंधन वाले मंदिरों को इसके अधीन लाया गया . राज्य के सबसे प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के प्रबंधन भी इससे बोर्ड के अधीन है .
सम्मलेन के दौरान ही यह बात सामने आई की इस संगम के आयोजना के लिए राज्य सरकार ने बोर्ड से 8 करोड़ से कुछ अधिक राशि बोर्ड से ली थी . जबकि सरकार ने हाई कोर्ट में यह लिखित रूप से दिया था कि इस बोर्ड से कोईं धन नहीं लिया जायेगा .
जब यह बात समाने आई तो इस सारे विवाद ने एक बड़ा रूप ले लिया . यह आरोप लगाये गए कि सबरीमाला मंदिर के चढ़ावे का दुरूपयोग हो रहा है . इस संगम में केरल के मुख्यमन्त्री विजयन पिनराई ने लगभग आधा दर्ज़न गैर बीजेपी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया था . इसमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम् . के . स्टालिन प्रमुख थे . लेकिन इस संगम में कोई भी मुख्यमंत्री नहीं आया . यह बात फ़ैल गई थी कि यह एक राजनीतिक अयोजन है तथा राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चा इसका लाभ उठाना चाहता है . इस पहले अगले महीने में राज्य में लगभग दस हज़ार पंचायत राज संस्थायों और स्थानीय निकायों के चुनाव है वाम मोर्चा ऐसे आयोजन के जरिये इसका लाभ इन चुनावों में भी लेना चाहता है .
जैसा कि स्वाभाविक था, राज्य विधानसभा के पिछले हफ्ते शुरू हुए सत्र में भी कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर सीधा हमला किया . उनका मुख्य आरोप था कि राज्य की वामपंथी सरकार अगला चुनाव जीतने के लिए खुलकर सरकारी धन का दुरूपयोग कर रही है . विदेशों से आये अतिथियों के आवास तथा अन्य सुविधायों पर बड़ी राशि खर्च की गई .
राज्य में कांग्रेस नीत लोकतान्त्रिक मोर्चा और मार्कसवादी कम्युनिस्ट नीत वाम मोर्चा हर पांच साल बाद बारी बारी से सत्ता में आते रहे है . लेकिन 2021 विधानसभा चुनावों में यह पहला मौका था जब वाम मोर्चा लगातार दूसरी बार सत्ता में आया . अब वाम मोर्चे की निगाह तीसरी बार लगातार विधानसभा के चुनाव जीतने पर नज़र टिकी हुई है। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)

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