

महाभारत कालीन पौराणिक कथाओं के अनुसार दुर्योधन ने पांडवों को 12 वर्ष का वनवास दिया इसी दौरान पांडव यहां भी रुके थे। भीम ने द्रोपदी की प्यास बुझाने के लिए अपनी गदा से चट्टान पर प्रहार करके इस कुंड का निर्माण किया था इसीलिए इसे भीमलत कुंड कहा जाता है। एक अन्य किवदंती के अनुसार भीम ने अपने पांव से लात मारी उससे इस कुंड का निर्माण हुआ। इसीलिए भी इसे भीमलत कुंड कहा जाता है।
आपदा के समय इसके पानी के जलस्तर में अपने आप वृद्धि हो जाती है। वैज्ञानिक और स्थानीय लोग इसे आज भी रहस्यमय मानते हैं। यह कुंड समुद्र से जुड़ा है। सुनामी जैसी आपदाओं के समय इसमें लहरें भी देखी जा सकती है। इसकी गहराई आज तक कोई भी नहीं नाप सका है। गोताखोर 300 मीटर से भी नीचे गए लेकिन इसका तल नहीं मिला क्योंकि अंदर बहुत तेज पानी का प्रवाह है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां पाई जाने वाली मछलियां समुद्र की गहराई में पाई जाने वाली मछलियां जैसी है इसमें छोटी-छोटी मछलियां पानी के ऊपर रहती है और बड़ी और भारी मछलियां कुंड के तल में रहती है। पानी साफ और नीला है। लेकिन आज तक पानी के स्रोत का पता नहीं चल सका है।
संकलन : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।