अय्यप्पा सबरीमाला मंदिर में सोने के चोरी का मामला

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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केरल में सबरीमाला पर्वत पर स्थित अय्यप्पा मंदिर में हर साल लाखों की संख्या में श्र्द्धालु जाते है। पर इन दिनों यह ऐतिहासिक मंदिर गलत कारणों से अखबारों की सुर्ख़ियों में है.इस मंदिर में सोने की एक कथित चोरी का मामला इतना तूल पकड़ गया है कि इस मामले में दो पुलिस शिकायतें दर्ज करवाई गईं हैं . केरल हाई कोर्ट ने इस मामले की जाँच के लिए पुलिस का विशेष जाँच दल गठित करने का निदेश दिया है। इस जाँच पर नजर रखने के लिए कोर्ट ने अपनी ओर से एक वकील को भी नियुक्त किया, जो लगातार जाँच के प्रगति की समीक्षा करता रहेगा।
यह कथित चोरी मई 2019 में हुई थी.अगर कुछ दिन इस मंदिर गर्भगृह के बाहर स्थित दो द्वार पालकों मूर्तियाँ अचानक गायब नहीं होती तो संभवतः सोने की इस चोरी का मामला कभी उजागर न होता। राज्य का सरकार का त्रावणकोर धर्मस्थल बोर्ड, जो कई अन्य मंदिरों सहित इस मंदिर का प्रबंधन देखता है। जब द्वार पालकों के अचानक गायब होने की बात सामने आई तो बवाल सा हो गया। लेकिन अचानक एक दिन ये दोनों मूर्तियों फिर वही पाई गईं। लेकिन यह रहस्य बना रहा कि आखिर ये मूर्तियों अचानक कहाँ चली गईं थी.राज्य का सबसे प्रभावी हिन्दू सम्प्रदाय नायर सर्विस सोसाइटी ने इसको लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई इसके बाद मामले ने बड़ा रूप ले ले लिया तथा कुछ हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन आदि भी किये।
2018 तक इस मंदिर गर्भ गृह के द्वार तांबे से मढ़े हुए थे। इसी प्रकार मूर्तियां भी धातू की थी। उसी समय बंगलुरु में रह रहे देश के एक बड़े व्यवसायी विजय माल्या, जो इन दिनों लन्दन में रह रहे है, इस मंदिर में आये। एक श्र्द्धालू के रूप में उन्होंने 42 किलो सोना अय्यप्पा को अर्पित किया। उन्होंने धर्मस्थल बोर्ड से आग्रह किया कि इस सोने का उपयोग द्वार तथा द्वार पालकों की दोनों मूर्तियों पर इस सोने से परत चढ़ाने के लिए किया जाये।
बोर्ड ने अपनी और से बंगलुरु केएक अन्य व्यवसायी उन्नीकृष्णन पोट्टी को इस को इसका अंजाम देने के लिए नियुक्त किया। क्योंकि चेन्नई में मूर्तियों पर सोने की परत चढाने के लिए अच्छे कारीगर है इस्ल्ये दावर के पट और दावर पालकों की मूर्तियों के वहाँ ले जाया गया। धर्मस्थल बोर्ड ने दैन्दिन काम देखने के लिए एक प्रशासनिक समिति बनाई हुई है।उस समय राज्य में वाम मोर्चे की सरकार थी तथा इसके एक नेता ए. पदमकुमार इस समिति के अध्यक्ष थे। दावर के दोनों पटों तथा मूर्तियों का वजन किया गया। जो परत चढ़ने के बाद इन दोनों का सोने सहित फिर वज़न किया गया। उसी समय यह फुसफुसाहट हुई कुल कुल वज़न में लगभग 4 किलो की कमी है। लेकिन किसी के कहने पर मामला दबा दिया गया।
जिस सोना मढ़ने वाली फर्म ने यह काम किया था उसने यह गारंटी दी थी कि अगले 40 साल तक इसे बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कुछ हफ्ते पहले जब यह मूर्तियाँ अचानक गायब हो गई तो यह कहा गया कि सोने के परत की मरम्मत के लिए इन्हें चेन्नई भेजा गया है। बाद में पता चला कि दोनों मूर्तियों को उन्नीकृष्णन पोट्टी ले गया है। यह भी पता लगा कि फ़िलहाल दोनों मूर्तियां पोट्टी के एक रिश्तेदार के घर में है। इस पहले की मामला आगे बढ़ता पोट्टी ने चुपचाप दोनों मूर्तियाँ वापिस मंदिर ला कर उनके स्थान पर स्थापित कर दिया। चूँकि मामला आगे बढ़ चुका था इसलिए पोट्टी को पूछताछ के लिए पुलिस ने बुलाया। उधर बोर्ड ने अपने स्तर भी कदम उठाने शुरू कर दिया। उस समय सोने के परत के काम से प्रमुख रूप से जुड़े एक वरीष्ठ अधिकारी मुरली को तुरंत प्रभाव सड़े निलंबित कर दिया। जब पुलिस में एक और शिकायत दर्ज़ हुई तो इसके तुरंत बाद नौ और कर्मचारियों को भी निलंबित कर दिया गया। बताया जाता है कि वाम सरकार और धर्मस्थल बोर्ड ने इस मामले को दबाने की कोशिश की। चूँकि मामला कोर्ट में जा चुका था इसलिए मामले के रफा दफा करने की कोशिशें कामयाब नहीं हुई. विशेष जाँच दल इस बात का पता लगा रहा है कि चेन्नई जाने से पहले सोना, द्वार पट तथा दोनों मूर्तियाँ किन किन हथों से गुजरी थी ताकि यह सबूत मिल सके की सोने के इस चोरी का मुख्य सरगना कौन था तथा इसमें और कितने लगो संलिप्त थे। धीरे धीरे इस मामले के सारी परतें खुलने लग जायेंगी। (लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)

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