
लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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दक्षिण के केरल राज्य में हाल ही में हुए स्थानीय निकायों और पंचायत राज सस्थायों के हुए चुनावों को राजनीतिक हलकों में अगले साल अप्रैल – मई में होने वाले विधानसभा चुनावों के सेमी फाइनल के रूप में देखा जा रहा है। राज्य की राजनीति पिछले कुछ दशकों से कांग्रेस नीत लोकतान्त्रिक मोर्चे तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नीत वाम मोर्चे के बीच दो धुरों में बंटी हुई है। इन दो ध्रुवों पर चल रही राजनीति ले चलते और कोई राजनीतिक दल बड़े रूप में उभरने से सफल नहीं रहा।
पिछले कई चुनावों से दोनों मोर्चे हर पांच साल बाद बारी बारी से सत्ता में आते रहे है। लेकिन 2021 के चुनावों में वाम मोर्चा लगातार दूसरी बार सत्ता में आने में सफल रहा। अब यह मोर्चा तीसरी बार सत्ता में आने के लक्ष्य को लेकर चल रहा था। इसलिए 9 और 11 दिसम्बर को हुए इन चुनावों को जीतने के लिए इस मोर्चे ने पूरी ताकत झौंक दी। लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे बाजी मार ली। राज्य की कुल 941 ग्राम पंचायतों के लिए हुए चुनावों में कांग्रेस नीत मोर्चा 505 पर जीतने में सफल रहा। जब कि वाम मोर्चे को 340 स्थानों पर जीत से ही सब्र करना पड़ा। इसी तरह कुल 152 प्रखंडों में से 79 प्रखंडों में कांग्रेस विजयी रही जबकि वाम मोर्चे को 63 प्रखंडों में सफलता मिली। 14 जिला पंचायतों में दोनों को 7 -7 स्थानों पर जीत मिली।
इसी प्रकार राज्य की कुल 87 नगरपलिकायों में से कांग्रेस ने 54 पर जीत दर्ज की जबकि वाम मोर्चे को 28 जगह ही जीत मिली। राज्य की 6 नगरनिगमों में में चार पर कांग्रेस का कब्ज़ा हुआ जब कि वाम मोर्चा एक स्थान पर ही चुनाव जीत पाया। सबसे आश्चर्य इस बात को लेकर हुआ कि बीजेपी भी इस बार न केवल दो नगरपालिकायों में जीती बल्कि राज्य की राजधानी तिरुवन्तपुरम नगर निगम में जीत दर्ज कराने में सफल रही। इस नगरनिगम पर वाम मोर्चे का पिछले 45 साल से लगातार कब्ज़ा बना हुआ था। इसी प्रकार बीजेपी को 26 ग्राम पंचायतों पर जीत हासिल हुई। बीजेपी 2016 में पहली बार विधानसभा के एक सीट जीती थी। इसके नेता राजगोपाल नेमोम सीट से विजयी हुए थे। पिछले लोकसभा चुनावों में एक सीट त्रिसूर पहली बार बीजेपी को मिली थी। यहाँ जाने माने फिल्म अभिनेता सुरेश गोपी जीतने सफल रहे, जो इस समय केंद्र में मंत्री है। ये सब नतीजे इस बात का संकेत देते है कि राज्य की राजनीतिक फिजां बदल रही है। विधान चुनावों के बाद यहाँ की पूरी राजनीतिक हवा बदल सकती है। कांग्रेस फिर सत्ता में आने की उम्मीद कर सकती है।
कुछ नेताओं का कहना कि राजधानी नगर निगम में बीजेपी की जीत को हलके से नहीं लिया जाना चाहिए। वे इस को राज्य में कमल खिलने के नजरिये से देख रहे है। इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस के नेता शशि थरूर लगातार तीसरी बार जीते है। वे कांग्रेस पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति के सदस्य है। यह अलग बात है वे पिछले कुछ समय से कांग्रेस से दूर होते नज़र आ रहे है। 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी अपने एक बड़े नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चन्द्रशेखर को यहाँ शशि थरूर के सामने उतारा था। वे केवल 16 ,000 मतों से चुनाव हार गए थे। चंद्रशेखर हैं तो मलयाली लेकिन उनका जन्म गुजरात में हुआ था जहाँ उनके पिता सरकारी सेवा में थे। मोदी सरकार के शासनकाल में उनको राज्यसभा सदस्य बनाया गया तथा बाद में उनको मंत्रिमंडल में भी शामिल किया गया।
उनका आई टी का बड़ा व्यवसाय है तथा अपना अधिकतर समय अहमदाबाद में गुजरता ही था। लोकसभा चुनावों के बाद मोदी और शाह ने उन्हें केरल में पार्टी का अध्यक्ष बना दिया। उन्होंने यह पद अनिच्छा से स्वीकार किया क्योंकि इससे उनके व्यवसाय पर असर पड़ता था। वे केरल के बड़े प्रभावी रूप में जाने जाने वाले नायर समुदाय से आते है। उन्होंने पार्टी के मुखिया के रूप में इसे बहुत सक्रिय कर दिया है। जिस ढंग से पार्टी ने स्थानीय निकायों और पंचायत के चुनावों में अपनी जीत दर्ज की है उसको देख कर लगता है कि इस बार विधानसभा के चुनावों में यह पार्टी कुछ सीटें जीतने में सफल हो सकती है। अगर ऐसे हुआ तो यह भगवा पार्टी आने वाले समय दो धुरों वाली राज्य की राज्य की राजनीति में तीसरी शक्ति के रूप में उभर सकती है। (लेखक के अपने विचार हैं)