कर्नाटक पुलिस में भ्रष्टाचार से खुद मुख्यमंत्री दुखी

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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कर्नाटक में पुलिस में फैले भ्रष्टाचार से न केवल आम जन त्रस्त है बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारामिया खुद भी इससे दुखी है। पिछले दिनों राज्य के आई पी एस अधिकारियों के वार्षिक सम्मेनल में बोलते हुए उन्होंने अपने इस दुःख का खुल कर इज़हार तथा कहा कि इस स्थिति से उन्हें खुद शर्म महसूस हो रही है . उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में न केवल निचले तथा मध्य क्रम के पुलिस अधिकारी बल्कि उच्च पदों पर नियुक्त अधिकारी भी लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल में कम से कम ऐसे 100 अपराध सामने आये जिनमें साधारण पुलिस कांस्टेबल के अलावा बड़े पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। पिछले एक साल में अपराधों में लिप्त पाए गए लगभग 150 पुलिस कर्मचारियों तथा पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया। सबसे से दुःख की बात यह है कि इनमें से अधिकांश कर्मचारी कुछ ही समय बाद अपना निलंबन वापिस करवाने में सफल रहे तथा फिर अपने पदों पर लौट आये।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में ऐसे अनके मामलों का विस्तार से विवरण दिया जिनमें पुलिस कर्मचारी या बड़े अधिकारी शामिल थे। कुछ समय पह्ले राज्य की राजधानी बंगलुरु में एक एटीएम चोरी होने की सनसनीखेज घटना हुई थी। जब इस मामले की जाँच हुई तो पता लगा कि चोरी करने वाले गिरोह का सरगना एक पुलिस कांस्टेबल था। राज्य की सबसे बड़ी केंद्रीय जेल राजधानी में है। सरकार के भरसक प्रयासों के बावजूद इस जेल में भ्र्ष्टाचार को रोकने में सफल नहीं हो पाई। अधिकारी बदले गए, निलंबित किये गए। अधिकारियों की स्थान पर जब नए अधिकारी आये तो कुछ समय तक तो स्थिति में सुधार हुआ लेकिन फिर वही स्थिति लौट आई। इस जेल की छवि ऐसी है कि रिश्वत दे कर यहाँ सजा काट रहे अपराधी कोई भी सुविधा पा सकते है। बीच बीच में अपराधियों के पास मोबाइल, शराब तथा नशीले पदार्थ मिलना आम सा हो गया है।
कुछ महीने पहले महाराष्ट्र की पुलिस ने बंगलुरु तथा मैसूरू में छापे मार कर भारी मात्रा में नशीले तथा अन्य मादक पदार्थ बरामद किये थे। नशीली दवाओं का धंधा राज्य पुलिस की नाक के नीचे हो रहा था लेकिन पुलिस अधिकारियों को इसकी खबर तक नहीं थी। महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि यह सब स्थानीय पुलिस की मिली भगत से हुआ। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया इस तरह के अपराधों में लिप्त पाए गए अधिकारियों में दो अधिकारी पुलिस महानिदेशक स्तर के थे तथा तीन अधिकारी पुलिस उप आयुक्त पदों पर थे। हाल में राज्य के एक पुलिस महानिदेशक, रामचंद्र राव का एक विडिओ वायरल हुआ था जिसमें वे एक महिला के साथ अश्लील मुद्रा में दिखते नज़र आ रहे है ये अधिकारी कुछ महीने पहले भी अख़बारों की सुर्ख़ियों में आये थे जब उनकी दत्तक पुत्री रान्या को बंगलुरु हवाई अड्डे पर दुबई से तस्करी लाये सोने के साथ गिरफ्तार किया था। जाँच में यह बात सामने यह बात सामने आई कि वह पिछले कुछ समय लगातार दुबई जा रही थी। जब भी वह वहां से लौटती तो हवाई अड्डे पर उसके पिता द्वारा भेजी गई पुलिस एस्कॉर्ट उनको बिना किसी सुरक्षा जाँच से हवाई अड्डे से बाहर लाने में सहायता करती थी। बताया जाता है कि रामचंद्र राव राज्य के गृह मंत्री जी. रामेश्वर के बहुत करीबी हैं। कुछ साल पहले उन्होंने रान्या के विवाह पर उसे एक हीरे की अंगूठी भेंट की थी। राज्य विधान सभा के हाल के शीतकालीन सत्र में राज्य के गृह विभाग पर तीन घंटे की चर्चा हुई थी। जिस पर सतारूढ़ पार्टी सहित प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी के विधायकों ने खुल कर कहा था कि राज्य पुलिस में मलाईदार पदों पर नियुक्तियों के लिए खुले आम बोली लगती है। जो अधिक बोली लगाता है उसे वह पद मिल जाता है। बीजेपी एक विधायक का यहाँ तक कहना था कि अगर कोई पुलिस आयुक्त का पद पाना चाहता हो तो उसे 50 करोड़ रूपये देने से मिल सकता है।उनको कहना था कि जो 50 करोड़ देगा वह यह पद पाने के बाद 100 करोड़ रूपये कमा लेगा।
बहस के दौरान यह बात भी कही गई कि सभी दलों के विधायक इस तरह की नियुक्तियों से पैसे कमाते है। राज्य में लोकायुक्त का पद है जिसका काम सरकार में भ्रष्टाचार पर नज़र रखना है। लेकिन यहाँ नियुक्त एक उप आयुक्त अधिकारी को ही रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। ऐसी तथा कुछ और घटनायों का उल्लेख सिद्धारामिया ने पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन में किया था। (लेखक के अपने विचार है)

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