हाईटेंशन विद्युत लाइनों से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की

जाफ़र लोहानी
www.daylifenews.in
मनोहरपुर (जयपुर)। सरपंच मदन यादव नगरपालिका पावटा – प्रागपुरा जिला कोटपुतली – बहरोड़ ने राव राजेन्द्र सिंह सांसद,जयपुर ग्रामीण व कुलदीप धनकड़ विधायक, विराटनगर जिला कलेक्टर जिला कोटपूतली – बहरोड़ से हाईटेंशन विद्युत लाइनों से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
यादव ने मांग की है कि हमारे क्षेत्र से होकर गुजर रही हाईटेंशन बिजली की बड़ी लाइनों के कारण किसानों के खेत बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इन लाइनों की वजह से खेती योग्य भूमि स्थायी रूप से खराब हो जाती है, फसल उत्पादन में भारी गिरावट आती है और किसानों की आजीविका पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके बावजूद अनेक स्थानों पर किसानों को आज तक पूरा और न्यायसंगत मुआवजा नहीं मिल पाया है। कई मामलों में प्रशासन द्वारा किसानों की समुचित सहमति के बिना ही उनके खेतों से हाईटेंशन लाइन निकालने का प्रयास किया जा रहा है, जो किसानों के हितों के पूर्णतः विपरीत है।
यह तथ्य भी सामने आया है कि जिन स्थानों पर किसानों एवं जन प्रतिनिधियों ने संगठित और सशक्त तरीके से विरोध दर्ज कराया, वहां एक – एक पोल के बदले किसानों को लगभग 50 लाख रुपये तक का मुआवजा प्राप्त हुआ।
वहीं,जिन क्षेत्रों में किसी प्रकार का विरोध नहीं हुआ, वहां किसानों को मात्र 30 से 50 हजार रुपये का ही मुआवजा देकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। मुआवजे में यह भारी असमानता अत्यंत अन्यायपूर्ण और दुर्भाग्यपूर्ण है।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में लिया गया निर्णय, जिसमें हाईटेंशन लाइन के लिए अधिग्रहित निजी भूमि के बदले किसानों को कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार 200 प्रतिशत मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है, एक सराहनीय कदम है। इसी प्रकार, राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा भी फतेहगढ़ भड़ला ट्रांसमिशन लिमिटेड को किसानों को उचित मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं। ये निर्णय स्पष्ट करते हैं कि किसानों को उनका अधिकार दिलाया जाना न्यायसंगत और आवश्यक है।
यादव ने कहा कि अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित भूमि के लिए उचित एवं समान मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। हमारी स्पष्ट मांग है कि किसानों को डीएलसी दर का कम से कम 10 गुना मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि उनके स्थायी नुकसान की भरपाई हो सके। यदि इस विषय में शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो किसानों को मजबूरन आंदोलन का मार्ग अपनाना पड़ सकता है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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