
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़, (राजस्थान)
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हमारे देश के प्रशासनिक व्यवस्था में इतना भ्रष्टाचार घुल मिल गया है कि कोई भी विभाग इससे अछूता नहीं है। कानून प्रवर्तन एजेंसियां, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मादक पदार्थों की अवैध तस्करी व बिक्री की रोक पर सख्ती से काम ले व त्वरित कार्रवाई करते हुए कठोर कानूनी सजा व भारी जुर्माना लगाया जाए तो इस पर कमी आ सकती हैं लेकिन घूसखोरी के कारण बड़े बड़े मादक पदार्थों के स्मगलर पकड़े नही जाते है केवल खाना पूर्ति की जाती है। अधिकारी अपना घर भरते है।स्थानीय स्तर पर भी अवैध मादक पदार्थों पर रोक लगे। पुलिस जाती है और हफ्ता वसूली करके वापस आ जाती है और अवैध कारोबार लगातार जारी रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विभिन्न देशों को एकजुट होकर अवैध मादक पदार्थों के आयात निर्यात पर रोक लगानी होगी। राजनीतिक संरक्षण के कारण निजी क्षेत्र के हवाई अड्डे पर भी अवैध मादक पदार्थों का आयात का कारोबार निर्बाध चल रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि आम जनता कि भी नैतिक जिम्मेदारी है कि वह स्वयं अपने स्तर पर जागरूक रहे व जन जागरूकता अभियान चलाकर नशे के दुष्प्रभाव के प्रति जागरूक करे। नशा करने के बाद साल छह माह की मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया जाता है। नशा करने वाले को होश ही नहीं रहता है कि किस उम्र की बच्ची को अपनी दरिंदगी का शिकार बना रहा है। मासूम बच्चियों की मौत हो जाती है। नाबालिग छोटे-छोटे बच्चे और युवा पीढ़ी अत्यधिक नशीले पदार्थों का सेवन करती है। देश की पूरी युवा पीढ़ी अवसाद में आकर नशे की लत से ग्रस्त है उसकी ऊर्जा को देश के सकारात्मक विकास की ओर ले जाया जा सकता है अगर देश में आसानी से मिलने वाले नशीले पदार्थों पर रोक लग जाए। अगर कोई स्वप्रेरणा से नशा मुक्त होना चाहे तो नशा मुक्ति केंद्र व सरकारी अस्पताल में ये सेवा नि:शुल्क उपलब्ध है। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)