

पंचायती राज सशक्तिकरण सम्मेलन
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जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जयपुर के बिड़ला सभागार में पंचायती राज सशक्तिकरण सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में राजस्थान प्रभारी सुखजिन्दर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, राजीव गॉंधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनिल पंवार सहित सिविल सोसाईटी के सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल, कमल टांक, मुकेश कुमार एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष तथा कांग्रेस नेता शामिल हुये।
इस अवसर पर उपस्थित कांग्रेसजनों को सम्बोधित करते हुये प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि 6 साल से अधिक समय पंचायती राज प्रतिनिधियों का चुनाव हुये बीत गया है, किन्तु इस सरकार ने जानबूझकर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुये प्रदेश में समय पर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं करवाये हैं। सरकार से सवाल है कि एक तरफ तो भाजपा के नेता एवं प्रधानमंत्री स्वयं संविधान की दुहाई देते हैं, संसद में प्रधानमंत्री संविधान को माथे पर लगाते हैं और दूसरी ओर संविधान के प्रावधानों का पूर्णतया उल्लंघन भाजपा की प्रदेश सरकार कर रही है। संविधान के आर्टिकल 243यू में और 243ई में स्पष्ट प्रावधान है कि पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव 5 वर्ष की अवधि में कराना आवश्यक है, किन्तु पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हुये एक साल बीतने के बावजूद भी चुनाव नहीं हुये हैं, सरपंच को प्रशासक लगा दिया, लेकिन प्रधान व जिला परिषद् सदस्य कार्यमुक्त हो गये हैं, पिछले दो वर्ष से ग्रामीण राजस्थान के विकास के लिये किसी प्रकार की राशि पंचायती राज संस्थाओं को नहीं मिल रही है और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास पूर्णतया भाजपा सरकार ने ठप्प कर दिया है। राजस्थान में भाजपा शासन की ऐसी स्थिति है कि जिन प्रधानों का कार्यकाल शेष था, उन्हें जानबूझकर निलम्बित किया जा रहा है, कोर्ट से आदेश लाने के बावजूद भी बेनुगाह साबित कर कोई प्रधान पुन: पद पर आ जाये तो उसे बिना कारण हटा दिया जाता है। कांग्रेस शासन में बिना भेदभाव के पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों का सम्मान किया जाता था और विकास के लिये राशि जारी होती थी। समय पर उप चुनाव करवाये जाते थे, किन्तु भाजपा हर प्रकार से भेदभाव कर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. राजीव गॉंधी ने संविधान में 73वां और 74वां संशोधन किया, जिस कारण पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से देश में नेतृत्व देने के लिये नये नेता उभर कर सामने आये, किन्तु भाजपा इस व्यवस्था के खिलाफ है, इसीलिये पंचायती राज संस्थाओं को नष्ट करने पर तुली हुई है। पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से देश के गरीब, पिछड़े, दलित, युवा और अल्पसंख्यक के सशक्तिकरण का काम हुआ था, जिसे भाजपा मिटाना चाहती है। माननीय उच्चत्तम न्यायालय ने 2021 में निर्णित किया था कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में ओबीसी को आरक्षण हेतु ओबीसी आयोग की सिफारिशें लेनी आवश्यक है, किन्तु प्रदेश में भाजपा की सरकार ने दो वर्ष तक ओबीसी आयोग का गठन नहीं किया और अब उन्हें संसाधन नहीं दिये जा रहे हैं, ऐसे में कब रिपोर्ट आयेगी और कब पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव सम्पन्न हो सकेंगे, यह समझ से परे है।
श्री डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में पर्ची से सरकार का गठन हुआ है और अब पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने के लिये भी केन्द्र से पर्ची आने का इंतजार मुख्यमंत्री करते रहे, इस फेर में प्रदेश के 3000 करोड़ रूपये भाजपा की सरकार गवाने की कगार पर है। यदि समय पर चुनाव हो जाते तो आज कई प्रधानों और सरपंचों का कार्यकाल डेढ़ वर्ष का हो चुका होता, गॉंवों में विकास की योजनायें बनती, वन स्टेट-वन इलेक्शन के नाम पर ग्रामीण विकास के लिये मिलने वाला कोष इस सरकार ने गवा दियाा, अब केन्द्र सरकार से पर्ची आ गई है कि मार्च में चुनाव नहीं हुये तो केन्द्र से मिलने वाले 3000 करोड़ लैप्स हो जायेंगे। भाजपा को गरीब और ग्रामीण विकास से कोई सरोकार नहीं है। केन्द्र की यूपीए सरकार के समय सीपीपी चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गॉंधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. डॉ. मनमोहन सिंह ने देश में गरीब के उत्थान के लिये मनरेगा चालू की थी। गरीब अपने बच्चों को पढ़ा रहा था, अपनी बेटियों के हाथ पीले कर रहा था, किसी साहूकार के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं थी, किन्तु केन्द्र सरकार ने ग्रामीण भारत की जीवनदायनी मनरेगा योजना को ही समाप्त कर दिया और गरीब के हितों पर जबरदस्त कुठाराघात किया है। केन्द्र की सरकार से मनरेगा के हिस्से का 5000 करोड़ रूपया आज भी राजस्थान का बकाया है, दो साल से काम रूके पड़े हैं, ऐसी परिस्थिति में नई योजना के तहत् प्रदेश सरकार अपना हिस्से का भार कैसे ग्रहण करेगी। मनरेगा योजना के तहत् केन्द्र सरकार जहॉं चाहेगा, वहीं बजट मिलेगा, जो काम चाहेंगे वहीं कराया जा सकेगा, जबकि पहले कोई भी गरीब व्यक्ति अपने गॉंव में बिना पलायन करे रोजगार पाने का अधिकारी था, लेकिन अब केन्द्र सरकार ने यह अधिकार छीन लिया है। प्रदेश पर पहले से ही सवा लाख करोड़ का ऋण का भार है, ऐसी परिस्थिति में मनरेगा के 40 प्रतिशत हिस्से का भार प्रदेश कैसे सहन करेगा, इसका जवाब भाजपा को देना चाहिये। उन्होंने कहा कि मनमर्जी से जनभावनाओं के विपरीत भाजपा की सरकार पंचायती राज संस्थाओं का परिसीमन कर रही है और यह कार्य भाजपा के राजेन्द्र राठौड़ और अरूण चतुर्वेदी कर रहे हैं, स्वयं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर अपने क्षेत्र की पंचायतों को परिसीमन करवाने के लिये मुख्यमंत्री से गुहार लगाने गये थे, ऐसी परिस्थिति में प्रदेश की जनता भाजपा का षडय़ंत्र समझ चुकी है और कितनी भी बेईमानी भाजपा कर ले अंत में वोट तो जनता को ही देना है, चुनावों में भाजपा से पूरा बदला प्रदेशवासी लेंगे।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उनका हक मिलेगा, जिसका अधिकार बनता है उसे प्रत्याशी बनने का मौका दिया जायेगा। किसी सिफारिश की आवश्यकता नहीं है, जिलाध्यक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और सही व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया जायेगा। कांग्रेस के सभी नेता एकजुट होकर पार्टी की मजबूत के लिये काम कर रहे हैं, राजस्थान में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है, केवल भ्रम फैलाया जा रहा है, इसलिये सभी कांग्रेस के सभी उपस्थित कार्यकर्ता यह संकल्प लेकर जायें कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में जो पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी होगा, सभी एकजुटता के साथ उसे जिताने के लिये कार्य करेंगे। पंचायती राज संस्थाओं में कांग्रेस के प्रत्याशियों को विजयी बनाये और सभी मिलकर 2028 में प्रदेश में भाजपा के कुशासन को समाप्त कर कांग्रेस की सरकार पुन: बने, यही संकल्प लेकर कार्य करें।
राजस्थान प्रभारी सुखजिन्दर सिंह रंधाव ने इस अवसर पर कहा कि पार्टी में राहुल गॉंधी ने बड़े बदलाव किये हैं और अब किसी की सिफारिश पर नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर टिकिट दिये जायेंगे। विधायक को दायित्व मिल गया, अब पंचायती राज संस्थाओं में कार्यकर्ताओं को मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब वे सक्रिय राजनीति में आये तो उनके पिता ने राजनीति छोड़ दी थी, इसी प्रकार सबको कार्य करना होगा। पंचायती राज को देश में कांग्रेस ने खड़ा किया है, इसमें भाजपा का कोई योगदान नहीं है, बल्कि भाजपा पंचायती राज संस्थाओं को समाप्त करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जो सत्ता के लिये पार्टी से जुड़े उसकी आवश्यकता नहीं है। अब पार्टी की मजबूती के लिये कार्य करना होगा, क्योंकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एक और आजादी की लड़ाई लडऩी पड़ेगी। जिस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम में प्रत्येक कांग्रेसी महात्मा गॉंधी के पीछे चल रहा था, उसी प्रकार अब राहुल गॉंधी के नेतृत्व में चलना होगा। कांग्रेस के सभी नेता एवं कार्यकर्ता पार्टी हित में लिये गये निर्णयों के साथ आमजनता के बीच जाकर भाजपा के कुशासन को उजागर करें और प्रदेश में कांग्रेस का शासन स्थापित हो इस हेतु कार्य करें।
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि वे स्वयं पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लडक़र नेता प्रतिपक्ष के पद तक पहुॅंचे हैं। जिला प्रमुख के रूप में जो कार्यकाल था, वह सबसे बेहतरीन रहा, क्योंकि हर व्यक्ति के लिये कुछ करने को और देने के लिये शक्ति थी। आज के पंचायती राज में जो सबसे सशक्त कार्य होता था, वह मनरेगा का कार्य था, जिसे भाजपा ने इस कानून का खत्म कर जनता के हितों पर कुठाराघात किया है। कांग्रेस शासन में मजदूरी का 100 प्रतिशत पैसा केन्द्र सरकार देती थी और सबको काम मांगने का अधिकार था, रोजगार सहायक काम देते थे और अब इस योजना के खत्म होने से ठेकेदार योजना चलायेंगे, जहॉं केन्द्र की मर्जी होगी वहीं काम मिलेगा और जिसे चाहेगें उसे ही काम देंगे। केन्द्र सरकार ने मनरेगा योजना समाप्त कर गरीब को मारने का कार्य किया है। मनरेगा योजना से देश में आधारभूत ढांचा बना था, गॉंव में समृद्धि आई थी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हुई थी, किन्तु भाजपा की केन्द्र सरकार ने इस योजना को धीरे-धीरे समाप्त किया है। कांग्रेस सरकार ने सात हजार करोड़ रूपये का बजट मनरेगा के लिये दिया था, किन्तु भाजपा की सरकार ने इसे कम कर दिया और अब यह योजना ही खत्म कर दी। प्रदेश की आर्थिक स्थिति इस वक्त ऐसी है कि पेंशन नहीं दे पा रहे हैं, विकास के कार्य रूके हुये हैं, इन परिस्थितियों में नई योजना को चलाने का 40 प्रतिशत खर्चा राज्य सरकार कैसे वहन करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा की मानसिकता गरीब विरोधी है, इस सरकार का पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में भाजपा को हराकर ईलाज करना आवश्यक है।
सम्मेलन को पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, राजीव गॉंधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील पंवार, राजीव गॉंधी पंचायती राज संगठन के प्रदेश प्रभारी सुश्री रीना वाल्मीकि, प्रदेशाध्यक्ष सी. बी. यादव, प्रधान संघ के अध्यक्ष दिनेश सूण्डा ने भी सम्बोधित किया। सम्मेलन में एमकेएसएस सिविल सोसाईटी के सामाजिक कार्यकर्ताओं शंकर लाल, मुकेश कुमार, कमल टांक आदि ने मनरेगा को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किये और मनरेगा बचाओ संग्राम पर अपने विचार व्यक्त किये।