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राजस्थान में एक बहुत प्रसिद्ध मंदिर है सांवरिया सेठ का। यह चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। चित्तौड़गढ़ शहर से 40 किलोमीटर दूर स्थित है। सन 1840 में भोलाराम नामक एक ग्वाले ने बागुड गांव के छापर में तीन दिव्य मूर्तियो को भूमिगत दफनाने का सपना देखा था। इस स्थल पर खुदाई करने पर भगवान की तीन सुंदर मूर्तियां प्राप्त हुई थी। एक मूर्ति को मंडपिया, दूसरी मूर्ति को भादसोडा, तीसरी मूर्ति को बागुंडी गांव के छापर में उसी स्थान पर रखी गई जहां से यह प्राप्त हुई थी। तीनों जगह मंदिर का निर्माण किया गया जो लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित है। यह मंदिर अहमदाबाद के अक्षरधाम की बनावट के अनुसार बना हुआ है। पहले यह कांच का मंदिर था। करोड़ों रुपए की राशि प्रति माह चढ़ावा आता है। उसके अलावा सोना, चांदी, विदेशी मुद्रा, चेक भी आते हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं। विशेष कर सावन के महीने में ग्रामीण क्षेत्र के गरीब पैदल यात्री ज्यादा आते हैं। बाहर दूर दूरसे आने वाले श्रद्धालुओं को खाने की दिक्कत पड़ती है। श्रद्धालुओं का कहना है मंदिर में प्रसाद भी वितरण नहीं किया जाता है। भक्तों का कहना है कि अगर हमेशा के लिए भंडारा खोल दिया जाए व निशुल्क चाय की व्यवस्था कर दी जाये तो श्रद्धालुओं के लिए अच्छी सुविधा हो जाएगी। श्रद्धालुओं को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
लेखिका : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।