
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
www.daylifenews.in
आजकल सोशल मीडिया को देख देख कर छोटी उम्र में ही लड़के, युवा यहां तक की उम्र दराज व्यक्ति भी लड़कियों, महिलाओं को रास्ते में आते जाते छेड़ते रहते हैं। इससे ये लड़कियां शर्मिंदगी महसूस करती है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी इंस्टाग्राम, फेसबुक के जरिए इनको फंसा लेते हैं और इसके परिणाम बहुत घातक होते हैं। इसलिए बचपन से ही माता-पिता अपने बेटों को ऐसे संस्कार दें कि वे बड़े होकर अपनी नैतिकता बनाए रखें और लड़कियों से छेड़छाड़ ना करें। उनका आदर करें। बेटियों को यह सिखाया जाए की छेड़छाड़ होने पर डरे नहीं अभिभावक को बताएं और पुलिस में रिपोर्ट करें। अन्यथा ऐसी मानसिकता को बढ़ावा मिलेगा। पुलिस कार्रवाई से समाज में भय व्याप्त होगा। छेड़छाड़ की घटनाओं में कमी भी आ सकती है। सोशल मीडिया पर भी अगर कुछ ग़लत हो रहा है तो साइबर सेल में रिपोर्ट करें।
विद्यालयों में प्राथमिक स्तर से ही बालिकाओं को जुड़े- कराटे का प्रशिक्षण दिया जाए। उच्च शिक्षा तक में भी ये प्रशिक्षण सतत बना रहे। इससे किसी भी विषम परिस्थितियों में वो अपनी सुरक्षा खुद कर सकती है। विद्यालयों में नैतिक शिक्षा का एक कालांश अवश्य होना होना चाहिए जहां बच्चों को विपरीत लिंग का सम्मान करना सिखाया जाए।
जहां पर भी महिलाओं का कार्य स्थल हो,सार्वजनिक पार्क, कोचिंग सेंटर, गर्ल्स कॉलेज, गर्ल्स हॉस्टल, गर्ल्स विधालय, महिलाओं के पीजी सेंटर, महिलाओं के कार्य स्थल, सार्वजनिक परिवहन आदि के आस-पास नियमित रूप से पुलिस की गहन व नियमित गश्त होनी चाहिए।
महिलाओं से छेड़छाड़ करने वाले पुरुषों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और कड़ी कार्रवाई कि जाए। जहां ऐसी घटनाएं ज्यादा होती है वहां पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाए। महिला हेल्पलाइन नंबर 1090 व 112 का ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार किया जाए। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर भी ज्यादा होने चाहिए क्योंकि अक्सर जरूरत पड़ने पर यह नंबर व्यस्त आते हैं इनकी सहायता नहीं मिल पाती है। (लेखिका के अपने विचार हैं)