
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। हाजी ईशाक खान ने कहा की हजरत बुर्रहानुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला आलेह की दुआ से मेरे चमन में बहार है यह शब्द हाजी ईशाक खान ने एक विशेष भेंट के दौरान में कहे
हाजी ईशाक खान ने कहा कि जिसकी जितनी हैसियत होती हैं वो उतनी बाबा के जायरिनों की सेवा करते है। कोई पानी पिलाता, कोई चाय ठोस बिस्कुट खिलाता है तो कोई ठंडा पिलाता है कोई आइसक्रीम बाटता है आदि वितरण करके जायरिनों की सेवा करते है
हाजी ईशाक खान ने कहा की “इरादे रोज बनकर टूट जाते हैं ताला में वही आते हैं जिन्हें बाबा बुर्रहानुद्दीन जी बुलाते हैं”
खान ने कहा कि यह वो दर है जहां पर बादशाहों व मंत्री से लेकर संतरी तक अपनी फरियाद लेकर आते रहते हैं और खुदा बाबा के आए हुए जायरीनों की लाज रखता है इसलिए तो लोग कहते हैं कि बाबा के दीवाने रंज ओ गम से मुरझाया नही करते हैं।
खान ने कहा कि हद तपे सो औलिया बे हद तपे सो पीर, हद बे हद तपे ताको नाम फकीर। उल्लेखनीय है कि हाजी ईशाक खान पिछले कुछ सालों से नमकीन पुलाव की 10 देग बनाकर सभी जायरिनों को वितरण करते आरहे है बाबा की दुआ से इनके सभी काम बनते जा रहे है।