आफत को निमंत्रण

लेखक : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
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सरकार विपक्ष पर आरोप लगा रही है की ऐसी मुसीबत के समय विपक्ष सत्ता पक्ष का साथ देने की बजाय गैस सिलेंडर की राजनीति कर रहा है। मुसीबत आई नहीं थी मोदी जी ने उसको निमंत्रण दिया था।
अमेरिका द्वारा ईरान के हमले के ठीक एक दिन पहले मोदी जी इसराइल गए और वहां से तमगा पहन कर खुशी-खुशी लौटे और बोले इजरायल इज फादरलैंड।वाणी पर संयम नहीं है इतने बड़े मंच पर क्या बोलना है, इसका वैश्विक स्तर पर क्या असर पड़ेगा। इसका कोई ध्यान नहीं है। क्या जरूरत थी उनको इजराइल जाने की, हमें क्या मतलब है दूसरों के युद्ध में हस्तक्षेप करने का, इतना बड़ा हमला तो योजना बना कर ही किया गया होगा और विश्व पटल की राजनीति में कुछ तो हलचल मची होगी तो मोदी जी क्या करने गए। ईरान से भारत के अच्छे संबंध थे। खुद मोदी जी ने ईरान यात्रा के दौरान कहा था कि ईरान से पुराने संबंध है। सन् दो हजार उन्नीस मई में अपनी स्वेच्छा से ईरान से तेल लेना बंद कर दिया। लेकिन घर बैठे बेवजह मुसीबत को न्यौता क्यों दिया।
भारत का 60% तेल व 80% गैस स्ट्रेट आफ होर्मुज समुद्री मार्ग से आता है जो कि ईरान से होकर गुजरता है। समुद्री मार्ग का 60 % मार्ग ईरान के रास्ते में आता है। क्या ये सब जानकारी सरकार को मालुम नहीं थी। सरकार कोई भी हो उसकी विदेश नीति देशहित में होनी चाहिए।
इतना सब कुछ हो गया, हमले में ईरान के सर्वोच्च पद पर आसीन नेता अयातुल्लाह अली खोमेनी मारे गए पर मोदी जी ने संवेदना के दो शब्द तक कहना जरूरी नहीं समझा। ईरान के नौसैनिक भारत की नौसेना के साथ युद्ध अभ्यास करने भारत आए थे। देश में भी घुमे सेल्फी ली और खुशी खुशी स्वदेश लौट रहे थे भारतीय समुद्री क्षेत्र में अमेरिका ने उस जहाज को मार गिराया सौ से अधिक नौसैनिक मारे गए पर उन मेहमानों की मौत पर भी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक संवेदना की घोषणा नहीं कि गई। इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी। ईरान के तीन जहाज को जब्त कर रखा है इंडियन नेवी ने इल्जाम लगाया है कि ईरानी जहाज गैर कानूनी तरीके से असेंबलिंग कर रहे थे। ईरान का कहना है कि हमने कोई गैर कानूनी काम नहीं किया है। तीनों जहाज को मुंबई बंदरगाह पर खड़ा कर रखा है। ईरान का कहना है कि पुराने संबंध है तो वैश्विक स्तर पर मोदी जी इस हमले की निंदा करें। लेकिन मोदी जी मौन है क्योंकि उनके घरों में सिलेंडर की कमी नहीं है।
मीडिया बड़ी शान से गुणगान कर रहा है कि गैस सिलेंडर के दो बड़े-बड़े जहाज भारत आ गये है लेकिन इससे क्या देश का संकट दूर हो जाएगा। इसका श्रेय सरकार लेना चाहती है लेकिन ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह भारत कि अवाम के लिए है क्योंकि भारत की अवाम उनके साथ हैं। ज्यादा जश्न मनाने की कोई जरूरत नहीं है अभी बाइस जहाज स्ट्रेट आफ होर्मुज समुद्री मार्ग में फंसे हुए हैं।
ज‌नता के घरों में लकड़ी के चुल्हों पर खाना बन रहा है। होटल रेस्टोरेंट भोजनालय बंद हो गए हैं लोग बेरोजगार हो गए हैं। गांव की तरफ पलायन कर रहे हैं। अयोध्या में राम की सीता रसोई में प्रसाद वितरण बंद हो गया है। चित्तौड़गढ़ जिले के सांवरिया सेठ मंदिर में भी एक समय के लिए भोजनशाला बंद है। मठरी बनाना बंद कर दिया है केवल लड्डू बन रहे हैं। पूरे देश में लगभग यही स्थिति है। सिलेंडर तीन से चार हजार रु. में मिल रहे हैं। लेकिन किसी भी सांसद, नेता, विधायक के घर में सिलेंडर की अफरातफरी नहीं मचेगी।
अंत में एक मुख्य बात साकेत पुरोहित नाम के एक शिक्षक ने इस विषय पर जरा सी मिमिक्री क्या कर दी बिना किसी नोटिस के उसे निलंबित कर दिया गया और जब बीजेपी का नेता हाईवे पर सरे आम अय्याशी कर रहा था तो पूरे देश के बीजेपी नेताओं के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। अब अभिव्यक्ति की आजादी भी खतरे में है। पता नहीं अब और जनता के कितने बुरे दिन आने बाकी हैं। (लेखिका के अपने विचार हैं)

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