
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़, (राजस्थान)
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ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूह को मजबूत बनाना चाहिए। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा वित्तीय जानकारी प्रदान की जाए। डिजिटल व मोबाइल से सुरक्षति भुगतान का तरीका सिखाया जाए। स्थानीय भाषाओं में सरल सहायता समूह बनाए जाए, विषय को समझने में आसानी रहे। तकनीकी भाषा में बैकिंग की भाषा के कठिन शब्द इस्तेमाल नही किए जाए। सखी समूह बनाकर महिलाओं को वित्तीय प्रशिक्षण दिया जाए ।डिजिटल साक्षरता का भी प्रशिक्षण दिया जाए। यूपीआई का उपयोग सिखाया जाए, ताकि वे घर-घर जाकर वित्तीय सेवा दे सके। लघु घरेलू उद्योग में निवेश करना, ऐसे उत्पाद बनाए जाएं जिनकी मांग ज्यादा से ज्यादा हो। आय व्यय का बजट व बचत करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाए। गांव में वित्तीय ज्ञान केंद्र की स्थापना करनी चाहिए ताकि महिलाएं को बचत, ऋण ,बजट संबंधी जानकारी दी जा सके। बजट बनाकर धन का उपयोग करना कर्ज से कैसे मुक्त रहा जाए ऐसी कार्यशालाएं समय-समय पर आयोजित की जाए। सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध करवाई जाए तो वे वित्तीय निर्णय के बारे में सोच समझकर फैसला कर सके। (लेखिका के अपने विचार हैं)