
करोड़ों खर्च, फिर भी चोरियों से सहमा कस्बा
जाफ़र लोहानी
www.daylifenews.in
मनोहरपुर (जयपुर)। कस्बे की सुरक्षा और अपराधों पर लगाम कसने के लिए नगर पालिका द्वारा शान से लगाई गई ‘तीसरी आँख’ अब खुद ही उपचार की बाट जोह रही है। सुरक्षा के नाम पर करीब एक करोड़ रुपये के भारी-भरकम टेंडर से मुख्य मार्गों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे शोपीस बनकर रह गए हैं। आलम यह है कि कस्बे में सुरक्षा का दम भरने वाली नगर पालिका अब खुद ही सवालों के घेरे में है।
लाखों की लागत, चंद दिनों की ‘फुर्ती’
नगर पालिका ने अपराधों पर अंकुश लगाने के दावे के साथ पूरे कस्बे में कैमरों का जाल बिछाया था। इनका कंट्रोल रूम मनोहरपुर थाने में स्थापित किया गया ताकि पुलिस अपराधियों पर पैनी नजर रख सके। लेकिन हकीकत यह है कि ये कैमरे लगने के कुछ दिन बाद ही ‘अंधे’ हो गए। तकनीकी खराबी और रखरखाव के अभाव में सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ा है।
बढ़ती चोरियां और लाचार पुलिस
कैमरों के बंद होने का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता और पुलिस प्रशासन को भुगतना पड़ रहा है। पिछले कुछ समय में कस्बे में चोरी की कई बड़ी वारदातें हुईं, लेकिन जब पुलिस ने सुराग के लिए फुटेज खंगाले, तो हाथ सिर्फ मायूसी लगी। कैमरों के बंद होने के कारण पुलिस को अपराधियों तक पहुँचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है, जबकि नगर पालिका अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ती नजर आ रही है।
भुगतान पर रोक या अनदेखी?
सूत्रों की मानें तो नगर पालिका द्वारा कैमरे लगाने वाले ठेकेदार को भुगतान न किया जाना भी इस व्यवस्था के ठप होने की एक बड़ी वजह है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी धन का दुरुपयोग सिर्फ कागजों का पेट भरने के लिए किया गया बिना सही मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस के करोड़ों रुपये की यह योजना अब जनता के लिए मजाक बनकर रह गई है।
पालिका के पीयूष शर्मा का कहना है कि भुगतान नहीं होने पर कमरे बंद पड़े हैं।ओर इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है कि कितने कैमरे लगाए गए ओर कितना भुगतान बकाया है।