
थोड़ा बाहर निकल
लेखक : वेदव्यास
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थोड़ा बाहर निकल
थोड़ा पैदल भी चल
थोड़ी करवट बदल
ये समय लौटकर फिर नहीं आएगा।
थोड़ा हिम्मत से चल
थोड़ा चेहरा बदल
थोड़ा बन जा सरल
ये जनम फिर दुबारा नहीं आएगा।
थोड़ी कर तू पहल
थोड़ा छत पर टहल
थोड़ा मन को बदल
ये चरण लौटकर फिर नहीं आएगा
थोड़ा फिर से मचल
थोड़ा यादों में जल
थोड़ा सुन ले गजल

ये सफर हंसते गाते ही कट जाएगा।