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खुशुब का सपना डाक्टर बनने का था। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।मां बाप सड़क हादसे में अपनी जान गवां चुके थे।उच्च शिक्षा के सपने अधूरे रह गए थे।रिश्तेदारों ने सरकारी विद्यालय में भर्ती करवा दिया था। समय गुजरता रहा। खुशबू कॉलेज में आगे की पढ़ाई करने के लिए आ गई। वहां अमीर घराने की लड़कियां थी नित नये परिधान पहनकर, सज सवंरकर मानो किसी फैशन प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आई हो। खुशबू के पास मात्र दो जोड़ी सलवार कुर्ते कमीज थे वह रोज धोकर उन्ही को पहनकर कॉलेज जाती थी। कपड़ों में सलवटे पड़ी रहती थी, पर इतने पैसे नहीं थे कि धोबी के यहां से प्रेस करवा सके। आर्थिक स्थिति भी ऐसी थी कि घर पर प्रेस लाने की सामर्थ्य भी नही थी। अमीर घरों की लड़कियां उसको देखकर नज़रें फेर लेती थी। वह कभी बुरा नहीं मानती थी उसको सिर्फ पढ़ाई से मतलब था।
खुशबू कुशाग्र बुद्धि थी। पढ़ने में होशियार थी। सदा प्रथम आती थी। कॉलेज में होने वाली सभी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती थी। इनाम लेकर आती थी। व्यवहार में नम्रता थी इससे कॉलेज में सबका दिल जीत लिया था। कॉलेज के प्राध्यापक इस गरीब होनहार बाला से अत्यधिक स्नेह करने लगे थे। धीरे धीरे अमीर घराने की लड़कियां भी इसकी सहेलियां बन चुकी थी, उससे प्रभावित होने लगी और उसका दुख बांटने लगी थी। पूरा 1 साल गुजर गया पता ही नहीं चला। नया साल आने वाला था। सभी सहेलिया अभिजात्य वर्ग की थी, सब ने धूमधाम से पांच सितारा होटल में नया साल मनाने का फैसला किया। खुशबू कहां जाती उसके पास तो पहनने के ठीक से कपड़े तक नहीं थे। सभी सहेलियों ने मिलकर तय किया। नए साल की पार्टी में खुशबू को जरूर ले जाएंगे और खर्चा सहेलियां मिलजुल कर बांट लेगी, पर खुशबू का आत्मसम्मान ही तो उसकी सबसे बड़ी पूंजी थी। अपना स्वाभिमान कैसे गिरवी रखती, वह इस बात के लिए नहीं मानी कि वह अपनी सहेलियों के खर्चे पर नया साल मनाने पांच सितारा होटल में जाए।
होटल में जाते वक्त सहेली निशा ने अंतिम बार कहा- प्लीज खुशबू हमारे साथ चलो बहुत मजा आएगा, खुशबू ने अपनी छोटी बहन के बीमार होने का बहाना बना लिया तो निशा ने कहा चलो कार से घर छोड़ देंगे कार में बैठी खुशबू का मन फूट फूट कर रोने को हो रहा था। रास्ते में खुशबू आलीशान पांच सितारा होटलों की भव्यता देखती रही।घर आने के बाद बाहर ही नए साल की पार्टी की कल्पना में खो गई उसकी छोटी बहन आशा ने उसे झिझोड़ा – दीदी बाहर खड़ी खड़ी क्या सोच रही हो सर्दी है अंदर चलो।
वक्त गुजरता रहा। उसके स्नातक की डिग्री भी पूरी हो चुकी थी।अधूरे सपने लिए वह अपने ससुराल आ गई ।पति व्यापारी थे । ससुराल में भरपुर परिवार था ।पति सबसे बड़े थे इस नाते सारी जिम्मेदारियां उन्हीं की थी। घर की आर्थिक स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं थी खर्चे बहुत थे खुशबू खुशी-खुशी सब की सेवा करती थी। पति से भी बहुत प्यार था पर पति ने कभी उसे भावनात्मक सहारा नहीं दिया। घर की जिम्मेदारियां पूरी करते-करते उसके खुद के दो बच्चे हो गए थे।आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो गई थी।कितने नए साल आए और गुजर गए उसे सोचने का वक्त ही नहीं मिला। हालांकि जब भी नया साल आता उसे कॉलेज के दिन याद आते, जब उसकी सहेलियां शानो शौकत से नया साल मनाने की योजना महीनो पहले से ही बनाना शुरू कर देती थी। धीरे-धीरे अंदर से बिखरने लगी थी। क्या वह जिंदगी भर सबके लिए यूं ही बलिदान करती रहेगी उसका भी कोई सपना कभी पूरा हो पाएगा?
एक बार फिर से नया साल आने वाला था। पति आते ही बोले – कल 31 दिसंबर है। मैं नया साल मनाने अपने दोस्तों के साथ पार्टी में जाऊंगा तुम इंतजार मत करना। खुशबू कुछ नहीं बोली हां हूं करके रह गई। 31 दिसंबर को शाम को पति घर आये और बोले- चलो तुम तैयार हो जाओ तुम्हें घुमा फिरा कर घर छोड़कर दोस्तों के साथ पार्टी में चला जाऊगा। वह अनमने ढंग से तैयार होकर गाड़ी में बैठ गई और आंखें बंद करके सोचने लगी आखिर मुझे किसी पार्टी में क्यों नहीं लेकर जाते। अपने अतीत में खो गई।
अचानक से गाड़ी का ब्रेक लगा तो उसने आंखें खोली तो गाड़ी शहर के सबसे मंहगे पांच सितारा होटल के सामने खड़ी थी। पति बोले – चलो, वह सम्मोहित सी पति के पीछे-पीछे चल दी। अंदर भव्य हाल सजा हुआ था। पति के सभी मित्र और उनकी पत्नियों ने उसका गर्म जोशी से स्वागत किया। सभी एक साथ बोल उठे – ‘हैप्पी न्यू ईयर’ वह आश्चर्यचकित सी खड़ी थी। पति ने नए साल पर जो सरप्राइज दिया, उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था। रात को 1:30 बजे पार्टी खत्म हुई और घर लौटे तो पति से बोली- आपका बहुत-बहुत आभार। नए साल की पार्टी मनाने का सपना जो बरसों पहले देखा था उसे आपने आज पूरा कर दिया यह कहकर खुशबू अपने पति के गले लग गई। पति प्यार से उसके सिर पर हाथ रखते हुए बोले – अब हर बार नया साल एक साथ मनाएंगे। खुशबू की आंखें खुशी के आंसू से भरी थी।
लेखिका : लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।