
लेखक: राम भरोस मीणा
पर्यावरणविद्, एल पी एस विकास संस्थान, थानागाजी, अलवर – राजस्थान
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विकास के नाम लुटेरों को पनाह दे हवा पानी मिट्टी बर्बाद किया, कीट पतंगों का जीना दुर्लभ और इंसानों को बीमारियों का अंबार दिया। ओ विकास तूने यह क्या किया….
चला पीला पंजा पर्वत पठार मैदान सबको हिला दिया, पहाड़ों को पाताल और जंगलों को साफ किया।ओ विकास तूने यह क्या किया…
नदियों की बहती अविरल धाराओं को रोक दिया, हवा पानी में भी ज़हर घोल दिया। ओ विकास तूने यह क्या किया….
आकाश में धुआं धकेलें, धरती पर धूल उड़ाई और स्वच्छता को जड़ से मिटाया । ओ विकास तूने यह क्या किया…
सिवरेज के नालों को यमुना जल में मिलाया, गंगा जी को मेला ढोने वाली और हर नदी को डायन बनाया। ओ विकास तूने यह क्या किया…..
अरावली में खदान बड़े, राजस्थान में ताप बढ़ा, दिल्ली में घात बढ़ा और चारों ओर विनाश बढ़ा। ओ विकास तूने यह क्या किया…