

फोटो : सद्दीक अहमद
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जयपुर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में सोमवार की शाम कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब पद्मश्री से सम्मानित ख्यातनामा भरतनाट्यम नृत्यांगना श्रीमती गीता चंद्रन ने अपने नृत्यवृक्ष डांस कलेक्टिव के साथ “काव्य कथा” प्रस्तुत की। कार्यक्रम में सभागार दर्शकों से भरा रहा और हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज छाई रही।
शिव स्तुति की दिव्यता, गोविंद वंदना की भक्ति, ओंकारकारिणी की ऊर्जा, वसंत ऋतु की काव्यात्मकता और सूरदास के पदों पर आधारित रामायण की लोरी—इन सभी भावनात्मक और आध्यात्मिक पक्षों को गीता चंद्रन ने अपनी विशिष्ट शैली में मंचित किया। संध्या का समापन ऊर्जावान तिल्लाना के साथ हुआ, जिसे दर्शकों ने खड़े होकर सराहा।
गीता चंद्रन के साथ नृत्यवृक्ष की प्रतिभाशाली कलाकार राधिका कथल, मधुरा भ्रुशुंडी, सौम्या लक्ष्मी नारायणन और यादवी शकधर मेनन ने भी मंच पर सामंजस्य और भावनात्मक गहराई का सुंदर योगदान दिया। जीवंत संगीत के साथ उनकी सामूहिक प्रस्तुति ने दर्शकों के अनुभव को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
प्रस्तुति के उपरांत गीता चंद्रन ने कहा कि भरतनाट्यम उनके लिए केवल नृत्य नहीं, बल्कि प्रार्थना, दर्शन और काव्य का जीवंत संगम है। उन्होंने कहा कि ‘काव्य कथा’ के माध्यम से वे जयपुर के दर्शकों तक शाश्वत कहानियाँ पहुँचाना चाहती हैं, जिन्हें वे अपने हृदय में सहेज सकें।
कार्यक्रम में जयपुर के अनेक गणमान्य अतिथि, साहित्यकार, कला-प्रेमी और सामाजिक हस्तियाँ उपस्थित रहीं। सभागार का माहौल सांस्कृतिक उत्सव में तब्दील हो गया और अंत में कलाकारों को तालियों से सम्मानित किया गया।
‘काव्य कथा’ केवल एक नृत्य प्रस्तुति नहीं रही, बल्कि एक सांस्कृतिक संगम बनकर सामने आई, जिसने यह संदेश दिया कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य जीवन के गहरे मूल्यों, आस्था और दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। (DIPR)