
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
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सोशियल मीडिया पर भरपूर अश्लील सामग्री उपलब्ध है। हर हाथ में मोबाइल है दिन भर ये अश्लीलता देख कर समाज के नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा हैं। आए दिन होने वाली दुष्कर्म की घटनाएं इस बात का प्रमाण है हद तो यह है कि ऐसे हादसों का उम्र से कोई संबध नहीं है किशोर से लेकर युवक, बुजुर्ग सब इन हादसों को अंजाम देते है। कई मासूम की तो मौत हो जाती है। पीड़िता आजीवन इसका दंश झेलती है कोई आत्महत्या कर लेती है। इसके बावजूद हमारे अंधे कानून में इनको जमानत भी मिल जाती है। समाज व देश में ऐसी अमानवीय कृत्य न हो इसके लिए सरकार अश्लील सामग्री पर रोक लगाए। कानूनी रूप से भी कठोर सजा तय करे तो दुष्कर्मियो में भय उत्पन्न होगा। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)