
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
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बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए जनता को गैस सिलेंडर में उलझा दिया गया। देश में हाहाकार मच रहा है। लोगों के घरों में खाना नहीं बन रहा है। होटल, भोजनालय, रेस्टोरेंट सब बंद पड़े हैं। इनमें काम करने वाले बेरोजगार हो गए हैं। मोदी जी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता वह पश्चिम बंगाल की चुनाव रैली में व्यस्त है। हर बार वो ऐसा ही करते हैं जब भी देश में कोई समस्या आती है वह विदेश यात्रा पर चले जाते हैं या चुनाव रैलियों में व्यस्त हो जाते हैं।
सन दो हजार उन्नीस मई में अमेरिका के आदेश के बाद भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया। उस वक्त ईरान ट्रांसपोर्ट और इंश्योरेंस फ्री में दे रहा था। भारतीय रुपए में तेल दे रहा था। अंतरराष्ट्रीय दर से 12% कम पर तेल दे रहा था। ₹60 का क्रेडिट दे रहा था। यहां तक की भारत के यूको बैंक में ईरान के पचास से ₹60000 के लगभग पड़े थे जिससे यूको बैंक बर्बाद होने से बच गया।
ईरान के हमले पर पहले ही दिन उनका सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खोमेनी की मौत हो गई। मोदी सरकार ने फोन पर बातचीत कर संवेदना तक व्यक्त करना जरूरी नहीं समझा। जब देश में गैस सिलेंडर के लिए तूफान आया तब ईरान याद आया। युद्ध के 13 दिन बाद मोदी जी ने ईरान फोन किया। ईरान ने स्ट्रेट आफ होर्मुज समुद्री मार्ग पर आवाजाही को प्रतिबंधित कर दिया जिससे भारत में तेल व गैस की आपूर्ति बाधित हुई। (लेखिका का अपना अध्ययन एवं अपने विचार है)