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भारत ने अंधापन (ब्लाइंडनेस) कम करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, लेकिन आंखों की किफायती देखभाल और उन तक पहुंच की कमी अभी भी लाखों लोगों के लिए जोखिम बनी हुई है। डॉ अरुण सिंघवी, एमडी एवं ग्रुप सीईओ, एएसजी आई हॉस्पिटल भारत ने आंखों की देखभाल (आई केयर) के क्षेत्र में शानदार प्रगति की है। 1976 में शुरू किया गया ‘राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण एवं दृष्टि हानि कार्यक्रम’ (नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस एंड विजुअल इम्पेयरमेंट) दुनिया का पहला सार्वजनिक वित्त पोषित राष्ट्रीय कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम की सफलता का ही परिणाम है कि देश में अंधापन की दर 1.4 प्रतिशत से घटकर 2019 तक 0.36 प्रतिशत हो गई है। लेकिन 1.4 अरब की आबादी वाले देश में यह छोटा सा प्रतिशत भी मायने रखता है।
मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) सर्जरी का ही उदाहरण लें, क्योंकि यह बड़ी आबादी को प्रभावित करता है। एक आंख की मोतियाबिंद सर्जरी की लागत अस्पताल और तकनीक के आधार पर लगभग 15,000 रुपये से लेकर 1,20,000 रुपये या उससे अधिक तक हो सकती है। राज्य अंधता नियंत्रण कार्यक्रमों और मोतियाबिंद के लिए विशेष अभियानों के साथ-साथ ‘आयुष्मान भारत पीएमजेएवाई’ (PMJAY) हेल्थ कवर ने भी आई-सर्जरी तक पहुंच में सुधार किया है।