

इफ्तार द्वारा सियासी ताकत दिखाने की कोशिश
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जयपुर। AIMIM के प्रदेश उपाध्यक्ष बाबू भाई फ्रिजवाले द्वारा आयोजित रोजा इफ्तार कार्यक्रम अब सियासी बहस का मुद्दा बन गया है। इस कार्यक्रम को लेकर विपक्षी हलकों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह धार्मिक आयोजन था या फिर राजनीतिक ताकत दिखाने का मंच? कार्यक्रम में AIMIM राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष जमील अहमद खान और प्रदेश उपाध्यक्ष लुकमान खान मल्कान की मौजूदगी ने इसे पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया। बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ को लेकर भी चर्चा है कि इसे पार्टी के बढ़ते जनाधार के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इफ्तार जैसे धार्मिक कार्यक्रमों को राजनीतिक मंच में बदलना समाज में विभाजन पैदा कर सकता है। वहीं कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऐसे आयोजनों के जरिए आम जनता की समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि AIMIM नेताओं ने इसे सामाजिक एकता और भाईचारे का कार्यक्रम बताया, लेकिन राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह आयोजन साफ तौर पर आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए किया गया शक्ति प्रदर्शन नजर आता है। जालूपुरा का यह इफ्तार कार्यक्रम अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सियासी रणनीति और दिखावे की राजनीति का उदाहरण बनकर चर्चा में है।